बीजेपी के पूर्व नेता संजय जोशी शनिवार को आरएसएस कैंप में हिस्सा लेंगे. वह 4 जनवरी तक गुजरात में ही रहेंगे. आपको बता दें कि संजय जोशी राष्ट्रीय स्वंयसेक संघ के कार्यकर्ता भी रह चुके हैं. शुक्रवार से अहमदाबाद में आरएसएस का कैंप का आयोजन हो रहा है.
गौर करने वाली बात है कि मोदी से विवाद के बाद संजय जोशी पहली बार आरएसएस की शिविर में हिस्सा लेंगे.
1998 में केशुभाई पटेल गुजरात के मुख्यमंत्री बने. बीजेपी की इस जीत का श्रेय गया संजय जोशी को. उनके संगठन कौशल की तारीफ हुई. इसके साथ संजय जोशी और नरेंद्र मोदी के रिश्तों के बीच खटास बढ़ गई.
मोदी और जोशी के रिश्ते की सच्चाई
कभी बीजेपी में भविष्य का नेता बताए जाने वाले संजय जोशी को सीडी विवाद के कारण पार्टी से इस्तीफा देना पड़ा. जब नितिन गडकरी बीजेपी के अध्यक्ष बने तो 6 साल बाद संजय जोशी की एक बार फिर पार्टी में वापसी हुई. उन्हें राष्ट्रीय कार्यकारिणी का सदस्य बनाया गया. पर यह मोदी को नागवार गुजरा.
2012 में मुंबई में पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक हुई. मोदी ने सार्वजनिक तौर पर नाराजगी तो जाहिर नहीं की पर बैठक में हिस्सा लेने से इनकार कर दिया. मोदी राष्ट्रीय कार्यकारिणी में संजय जोशी की मौजूदगी से नाराज थे. आखिर में पार्टी को मोदी के आगे झुकना पड़ा. दबाव में संजय जोशी ने राष्ट्रीय कार्यकारिणी से इस्तीफा दे दिया.