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संस्कृत ज्ञान के साथ दे रोजगार, ऐसी बनाई जाए शिक्षा नीति

शिक्षा ज्ञान के साथ रोज़गार भी दे इसके लिए नए सिरे से ऐसी शिक्षा नीति बनाई जाए जो किसी भी क्षेत्र और रुचि के छात्र को ऐसा ज्ञान दे जो उसकी रोजी रोटी के नए आयाम खोल सके. इनोवेशन की प्रेरणा दे सके. इन सब विषयों पर चर्चा के लिए बुधवार को केंद्रीय शिक्षा सलाहकार बोर्ड की बैठक में मुद्दा अंग्रेजी बनाम संस्कृत का छाया रहा.

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संस्कृत
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शिक्षा ज्ञान के साथ रोज़गार भी दे इसके लिए नए सिरे से ऐसी शिक्षा नीति बनाई जाए जो किसी भी क्षेत्र और रुचि के छात्र को ऐसा ज्ञान दे जो उसकी रोजी रोटी के नए आयाम खोल सके. इनोवेशन की प्रेरणा दे सके. इन सब विषयों पर चर्चा के लिए बुधवार को केंद्रीय शिक्षा सलाहकार बोर्ड की बैठक में मुद्दा अंग्रेजी बनाम संस्कृत का छाया रहा. संस्कृत को कैसे नई पीढ़ी और प्रोफेशन के बीच पुल की तरह बनाया जाये इस पर भी बात हुई.

नई शिक्षा नीति बनाने के लिए 25 साल बाद हुई पहल एक बार फिर अंग्रेजी और संस्कृत की पढ़ाई पर टिक गई है. केंद्रीय शिक्षा सलाहकार बोर्ड की बैठक में चर्चा होनी थी सुब्रमण्यम कमेटी की सिफारिशों पर आए लाखों सुझावों में से कुछ अहम बिंदुओं पर. अब केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय एक और कमेटी बनाने जा रहा है जो इन सुझावों और सुब्रमण्यम कमेटी की सिफारिशों के आधार पर नई रोज़गारपरक शिक्षा नीति का खाका तैयार करेगी.

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इस मीटिंग में इस पर भी बहस हुई कि अंग्रेजी की पढ़ाई बचपन से हो या छठी से. इस पर भी बात हुई कि संस्कृत की पढ़ाई को कैसे नई पीढ़ी के अनुकूल बनाया जाये ताकि संस्कृत की पढ़ाई रोज़गार का जरिया बन सके. वैसे पिछले सत्र में राज्यसभा ने नई शिक्षा नीति को रोज़गारपरक बनाने के मुद्दे पर चर्चा की थी. तब समय कम था लिहाज़ा अब एक बार फिर सरकार 10 नवम्बर को सांसदों के साथ भी नई शिक्षा नीति के मसौदे पर चर्चा करेगी. इसका मुद्दा रहेगा संस्कृत, हिंदी, उर्दू और फारसी जैसी भाषाओं को इनोवेशन के साथ व्यवसाय से जोड़ा जाए.

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