मुंबई के डांस बार के मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार से कहा है कि जिन 60 लोगों ने लाइसेंस के लिए अर्जी दी है दो हफ्ते में उसका निपटारा करें. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि डांस बार एक सम्मानित पेशा है. कोर्ट ने साफ किया कि किसी भी किस्म की अश्लीलता नही होनी चाहिए इसके लिए राज्य सरकार कानून बनाने के लिए स्वतंत्र है. लाइसेंसिंग ऑथोरिटी इस बारे में नियम बनाने को स्वतन्त्र है.
2014 में महाराष्ट्र सरकार ने कानून बनाकर डांस बार चलाने पर रोक लगा दी थी. उस फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने पलटते हुए कुछ दिन पहले ही डांस बार खुलने से रोक हदा दी. ऐसे में मुंबई में जल्द ही बार गर्ल्स का जलवा फिर से होगा.
अदालत ने हिदायत दी है कि डांस बार के जरिए किसी तरह की अश्लीलता नहीं होनी चाहिए. बताते चलें कि डांस बार पर पहली बार महाराष्ट्र में 2005 में रोक लगी थी. अप्रैल 2005 में लगाए गए पहले बैन के बाद करीब 1.5 लाख लोग बेरोजगार हो गए थे इनमें से 70 हजार बार गर्ल्स भी थीं.
सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले के डबल स्टैंडर्ड की आलोचना करते हुए कहा था कि सिर्फ छोटे होटलों के लिए ही रोक लगाई गई है. जबकि, 5 स्टार और थ्री स्टार होटलों पर कोई रोक नहीं है. इस साल जून में सरकार ने सभी होटलों पर बैन लगा दिया था.
शीर्ष अदालत के इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि राज्य सरकार डांस बार के खुलने के खिलाफ है और इसका कानूनी रास्ता खोज लिया जाएगा.
We respectSC order.However,we're principally against opening of dance bars.Will explore all legal options including legislative intervention
— Devendra Fadnavis (@Dev_Fadnavis) November 26, 2015