scorecardresearch
 

साइंस: लोयोला साइंस कोर्स के मामले में अग्रणी

कॉलेजों में प्रिंसिपल के दफ्तर के सामने कतार दिनोदिन लंबी होती जा रही है. लोयोला कॉलेज, चेन्नै में छात्र और उनके अभिभावक विज्ञान कोर्स में दाखिले के लिए इंटरव्यू का इंतजार कर रहे हैं.

Advertisement
X

कॉलेजों में प्रिंसिपल के दफ्तर के सामने कतार दिनोदिन लंबी होती जा रही है. लोयोला कॉलेज, चेन्नै में छात्र और उनके अभिभावक विज्ञान कोर्स में दाखिले के लिए इंटरव्यू का इंतजार कर रहे हैं. इसमें कोई अनोखी बात नहीं है क्योंकि लोयोला साइंस कोर्स के मामले में अग्रणी बन उभरा है. इसके बाद दिल्ली के  सेंट स्टीफंस और कोलकाता के सेंट जेवियर का नाम क्रमशः दूसरे और तीसरे नंबर पर आता है, तो मुंबई का सेंट जेवियर चौथे नंबर पर आया है.

अहमदाबाद का सेंट जेवियर आला 10 कॉलेजों में
सर्वेक्षण में हैरान करने वाली स्थिति रही है, निचले स्तर पर-बंगलुरू का क्राइस्ट कॉलेज 8वें नंबर से 13वें पर आ गया और अहमदाबाद का सेंट जेवियर आला 10 कॉलेजों में 10वें नंबर पर पहुंचा. लोयोला के अलावा चेन्नै के तीन कॉलेज-प्रेसीडेंसी कॉलेज, मद्रास क्रिश्चियन कॉलेज और स्टेला मेरिस- ने शीर्ष के 12 में जगह पाई है. और इस तरह एक बार फिर चेन्नै में लाइफ साइंसेज पर जोर दिया गया है.

सामाजिक परिवेश से सरोकार
फिर लोयोला की बात करें तो यह स्पष्ट है कि पढ़ाई कक्षाओं के परे भी है. अपने शहर में बदलाव के प्रतिनिधि बनने का दावा करने वाले कॉलेज बहुत अधिक नहीं हैं. लेकिन 1950 के दशक से ही लोयोला, नगर नियोजन में  शोध आधारित अभियान चलाने में मद्रास सिटी कॉर्पोरव्शन की मदद कर रहा है. पिछले कुछ वर्षों से छात्र और अध्यापक ऐसी परियोजनाओं में शामिल रहे हैं, जिसके लिए वित्तीय सहायता भारत सरकार ने दी (सूचना प्रौद्योगिकी).

प्रयास से आया बदलाव
इस परियोजना के तहत चेन्नै में बड़े नालों का पुनर्गठन शामिल है, असल में शहर में जल जमाव और पानी से होने वाली बीमारियों की यही मुख्य वजह है. इस प्रयास की बदौलत आज काफी बदलाव महसूस किया जा रहा है. परियोजना का नेतृत्व करने वाले एडवांस्ड जूलॉजी ऐंड बायो टेक्नोलॉजी विभाग में प्रोफेसर डॉ. एस. विन्सेंट कहते हैं, ''हमारे छात्र सिर्फ शोध नहीं करते, वे परियोजनाओं का क्रियान्वयन भी करते हैं.''

जो सीखा है उसे अमल में लाएं
इसी तरह लोयोला में ग्लोबल वार्मिंग महज सेमिनार का विषय नहीं है, छात्रों से कहा जाता है कि उन्होंने जो सीखा है उसे अमल में लाएं. परिसर में कूड़ा प्रबंधन के लिए वर्मिन कंपोस्ट खाद ऐसा एक प्रयास है. कॉलेज में संकाय ने भी अपनी बिजली जरूरतों का 50 फीसदी सौर पैनलों के जरिए पूरा करने के लिए महत्वाकांक्षी योजना तैयार की है. सतत नए प्रयोग करते रहने का माद्दा ही लोयोला को दूसरों से श्रेष्ठ ठहराता है.

तपेदिक(टीबी) के लिए वैक्सीन की तैयारी
विन्सेंट नाली रखरखाव, प्रोजेक्ट एलीफैंट और तमिलनाडु काउंसिल फॉर साइंटिफिक टेक्नोलॉजी के लिए परियोजना में व्यस्त रहते हैं तो डॉ. एस. इग्नासिमुतु जैसे विद्वान तपेदिक (टीबी) के लिए वैक्सीन तैयार करने के कगार पर हैं. वे बताते हैं, ''हम पौधों में एक माइक्रोबियल एंटीजेन इंजेक्ट करके ऐसे एंटीबॉडीज पैदा करने करने का प्रयेग कर चुके हैं जिन्हें टीबी के वैक्सिन के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है.'' विश्वविद्यालय अनुदान आयोग और वित्तीय सहयोग देने वाली दूसरी संस्थाएं यह आश्वस्ति देती हैं कि परियोजनाओं को आर्थिक तंगी न रहे. विन्सेंट कहते हैं, ''आर्थिक अनुदान देने वाली संस्थाएं पारदर्शिता और अच्छे परिणामों की उम्मीद करती हैं, और यह ऐसी चीज है जिसके बारे में हमें हमेशा ही पूरा भरोसा होता है.''{mospagebreak}पिछले शैक्षिक सत्र में लोयोला को शोध संबंधित परियोजनाओं के लिए 1 करोड़ रु. का अनुदान मिला. विदेशी विश्वविद्यालयों के साथ आठ सहमति पत्रों पर हस्ताक्षर हो चुके हैं, इस तरह विश्वविद्यालयों और कॉर्पोरव्ट संस्थाओं के साथ होने वाले करार की संख्या 45 हो चुकी है. प्लेसमेंट प्रकोष्ठ यह व्यवस्था करता है कि 40 फीसदी छात्रों को अच्छी नौकरियां मिलें. पास होने वाले लगभग 50 फीसदी छात्र शोध परियोजनाओं में काम करने का फैसला करते हैं, उनमें भी अधिकतर अपने ही संस्थान में. पीएचडी छात्रों और स्कॉलरों को देर तक रुके रहना और चौबीसों घंटे खुले रहने वाले पुस्तकालय या प्रयोगशाला में व्यस्त रहना असामान्य बात नहीं है.

बेहतर सुविधाएं पाने की उम्मीद
विज्ञान में जो विषय पढ़ाए जाते हैं, उनमें विजुअल कम्युनिकेशन में बीएससी, प्लांट बायोलॉजी, बायो टेक्नोलॉजी, और आहार विज्ञान तथा खाद्य प्रसंस्करण शामिल हैं. लोयोला पहले से ही भविष्य की ओर देख रहा है. लोयोला के प्रिंसिपल रेवरेंड डॉ. ए. अलबर्ट मुतुमलै कहते हैं, ''आने वाले वर्षों में हमें अत्याधुनिक क्लासरूम और ई-लर्निंग जैसी सुविधाएं पाने की उम्मीद है. हमारे बुनियादी ढांचे को नए सिरे से गठन करने की जरूरत है.'' उनका यह भी कहना है कि ''विज्ञान अपनी पूरी संभावनाएं तभी हासिल कर सकता है जब इसका उपयोग समाजसेवा के लिए हो.''

वंचित पृष्ठभूमि वाले छात्रों के लिए स्तरीय शिक्षा
इस साल दूसरा दर्जा पाने वाले सेंट स्टीफंस में उपलब्धियां हासिल करने वालों को तमाम समर्थन देने के दर्शन की बदौलत ऐसे छात्रों की पौध तैयार करने में मदद मिली है जिन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में श्रेष्ठता हासिल की है. भारी संख्या में छात्र विदेशों में प्रतिष्ठित स्कॉलरशिप के लिए चुने जा रहे हैं. सेंट स्टीफंस के नए प्रयासों में एक है, वंचित पृष्ठभूमि वाले छात्रों के लिए स्तरीय शिक्षा मुहैया उपलब्ध करवाना. सेंट स्टीफंस कॉलेज में डीन नंदिता नारायण कहती हैं, ''इस साल जरूरतमंद छात्रों को हमने रिकॉर्ड संख्या में छात्रवृत्तियां दी हैं.'' इसी तरह तीसरी रैंकिंग पाने वाले सेंट जेवियर्स, कोलकाता को हाल ही में स्वायत्तता मिली है. इस कॉलेज ने भी अंडरग्रेजुएट स्तर पर विभिन्न नए क्षेत्रों में छात्रों के लिए इंटर्नशिप शुरू की है.

तीन हफ्ते की इंटर्नशिप की व्यवस्था
कॉलेज के प्रोफेसर फादर फेलिक्स राज कहते हैं, ''छात्र अपने विषय को बेहतर तरीके से समझ सकें, इस उद्देश्य से विभिन्न उद्योगों में न्यूनतम तीन हफ्ते की इंटर्नशिप की व्यवस्था की गई है.'' इस साल विज्ञान विषय में दाखिले के लिए कॉलेज को 4,500 आवेदन प्राप्त हुए हैं. खासकर फिजिक्स, केमिस्ट्री, स्टैटिस्टिक्स, कंप्यूटर साइंस, बायोकेमिस्ट्री, माइक्रो बायोलॉजी और बायो टेक्नोलॉजी जैसे विषय खासे लोकप्रिय हैं. उपकरणों से लैस प्रयोगशालाएं व्यावहारिक मदद उपलब्ध कराती हैं, और यही चीज इसे दूसरों से अलग करती है.  
-साथ में सेंथिल कुमार और एलोरा सेन

Advertisement
Advertisement