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यौन शोषण केस: चिन्मयानंद की जमानत के खिलाफ SC में याचिका

स्वामी चिन्मयानंद को यौन शोषण के एक मामले में 3 फरवरी को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने जमानत दे दी. इसके खिलाफ पीड़िता ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है.

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पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वामी चिन्मयानंद (फाइल फोटो-PTI)
पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वामी चिन्मयानंद (फाइल फोटो-PTI)

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  • इलाहाबाद हाई कोर्ट ने दी थी जमानत
  • पीड़िता बोली- मुझे जान का खतरा

यौन शोषण केस के आरोपी पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वामी चिन्मयानंद को मिली जमानत के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है. पीड़िता ने कहा कि चिन्मयानंद की वजह से उसकी जान को खतरा है. पीड़िता की याचिका पर सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट तैयार हो गया है. अब कोर्ट मामले की सुनवाई सोमवार को करेगा.

स्वामी चिन्मयानंद को यौन शोषण के एक मामले में 3 फरवरी को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने जमानत दे दी. जस्टिस राहुल चतुर्वेदी ने जमानत पर फैसला सुनाते हुए चिन्मयानंद को रिहा करने का आदेश दिया था. इस मामले में पीड़ित छात्रा और उसके साथियों की जमानत हाई कोर्ट से पहले ही मंजूर हो चुकी है. चिन्मयानंद 20 सितंबर से जेल में थे. इससे पहले रंगदारी मामले में आरोपी पीड़ित छात्रा को हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद 11 दिसंबर को शाहजहांपुर जेल से रिहा कर दिया गया था.

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पढ़ें: यौन शोषण के समय पीड़िता की चुप्पी... और चिन्मयानंद को मिल गई बेल

क्या है पूरा मामला

केंद्रीय गृह राज्यमंत्री स्वामी चिन्मयानंद पर एसएस लॉ कॉलेज की छात्रा ने दुष्कर्म का आरोप लगाया था. मामले में स्वामी चिन्मयानंद अभी उत्तर प्रदेश की शाहजहांपुर जिला जेल में बंद थे. इससे पहले चिन्मयानंद प्रकरण से जुड़े मामले की सुनवाई 23 जनवरी को हुई थी. जस्टिस मनोज मिश्र और जस्टिस दीपक वर्मा की पीठ ने मामले को सुना था.तब चिन्मयानंद द्वारा दाखिल मॉनिटरिंग केस में पक्षकार बनाए जाने की मांग को पीठ ने अस्वीकार कर दिया था. साथ ही जमानत पर फैसला सुरक्षित रख लिया था.

एसआईटी कर रही है मामले की जांच

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर एसआईटी दुष्कर्म और रंगदारी मामले की जांच कर रही है. एसआईटी पीड़ित छात्रा और चिन्मयानंद दोनों के खिलाफ दर्ज मुकदमों में चार्जशीट दाखिल कर चुकी है. इससे पहले बीते माह स्वामी चिन्मयानंद के पैरोल के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल की गई थी. अर्जी में चिन्मयानंद के खराब स्वास्थ्य का हवाला देते हुए कहा गया था कि इलाज कराने को उन्हें कुछ समय के लिए जेल से रिहा किया जाए.

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