लोकसभा में बहस के दौरान कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने अनुच्छेद 370 को हटाए जाने के फैसले को लोकतंत्र के लिए काला दिन करार दिया है. उन्होंने कि कांग्रेस भी कश्मीर को अभिन्न अंग मानती है. लेकिन इस बिल से लोकतांत्रिक व्यवस्था, वैश्विक परिवेश और हमारी विश्वसनीयता को आघात पहुंचा है.
शशि थरूर ने कहा कि आपने अमरनाथ यात्रा को रद्द कर दिया, वहां भारी संख्या में सेना की तैनाती कर दी गई. इन्हीं सब कारणों से हम इसे काला दिन कह रहे हैं. उन्होंने सवाल किया है कि क्या सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल को लेकर गृहमंत्री अमित शाह जम्मू कश्मीर जाएंगे.
शशि थरूर ने कहा, 'हम इसे काला दिवस क्यों न मानें? क्योंकि जम्मू कश्मीर के दो पूर्व मुख्यमंत्रियों महबूबा मुफ्ती और उमर अब्दुल्ला को गिरफ्तार कर लिया गया है. हमारे सहयोगी फारूक अब्दुल्ला अभी कहां हैं, इसके बारे में किसी को कोई जानकारी नहीं है. हम जानना चाहते हैं कि वह कहां हैं?'
Shashi Tharoor, Congress: Why we think it is indeed a black day? Because two former J&K CMs Omar Abdullah&Mehbooba Mufti are under arrest & the whereabouts of our own colleague Farooq Abdullah are still unclear. We still want to know where he is? pic.twitter.com/Wdouz2LKDP
— ANI (@ANI) August 6, 2019
हम सभी को याद है कि प्रधानमंत्री ने एक फैसला सुनाया था जिसे सराहा गया था, लेकिन विमुद्रीकरण आपदा साबित हुई. देश आज भी विमुद्रीकरण के विनाशकारी नतीजों को भुगत रहा है. विमुद्रीकरण की तरह यह फैसला भी कही विनाशकारी न साबित हो जाए.
सुप्रीम कोर्ट में सरकार के फैसले को चुनौती
बहरहाल, जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाने की प्रक्रिया को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है. वकील मनोहर लाल शर्मा ने अपनी याचिका में कहा है कि अनुच्छेद 370 को हटाने के लिए सरकार ने आर्टिकल 367 में जो संशोधन किया है, वह असंवैधानिक है. सरकार ने मनमाने और असंवैधानिक ढंग से कार्रवाई की. सुप्रीम कोर्ट से इस अधिसूचना को असंवैधानिक घोषित कर रद्द करने की मांग की गई है.
वकील मनोहर लाल शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाई है कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने की अधिसूचना की संविधान की मूल भावना के खिलाफ है. मनोहर लाल शर्मा बुधवार को अपनी याचिका पर तत्काल सुनवाई की गुहार लगा सकते हैं. इस याचिका में कहा गया है कि अनुच्छेद 370 को हटाने के लिए सरकार ने अनुच्छेद 367 में जो संशोधन किया है वो अंसवैधानिक है. याचिकाकर्ता का आरोप है कि सरकार का कदम मनमाना और अंसवैधानिक है. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट को इस अधिसूचना को अंसवैधानिक घोषित करनी चाहिए