अर्थव्यवस्था को लेकर शिवसेना ने मोदी सरकार पर निशाना साधा. अपने मुखपत्र सामना में शिवसेना ने लिखा, 'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी में अर्थव्यवस्था सुधार करने की इच्छा दिखाई नहीं देती. मोदी जब प्रधानमंत्री नहीं थे तब प्याज की बढ़ती कीमतों पर उन्होंने चिंता व्यक्त की थी. वे गुजरात के मुख्यमंत्री थे तब उन्होंने कहा था कि प्याज जीवन के लिए आवश्यक वस्तु है. अगर ये इतना महंगा हो जाएगा तो प्याज को लॉकर्स में रखने का वक्त आ गया है. आज उनकी नीति बदल गई है.
शिवसेना ने कहा, 'मोदी अब प्रधानमंत्री हैं और देश की अर्थव्यवस्था धराशायी हो गई है. बेहोश व्यक्ति को प्याज सुंघाकर होश में लाया जाता है, लेकिन अब बाजार से प्याज ही गायब हो गया है. इसलिए यह भी संभव नहीं है. उस पर देश की अर्थव्यवस्था का जो सर्वनाश हो रहा है उसके लिए पंडित नेहरू तथा इंदिरा गांधी को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है. निर्मला सीतारामण देश की वित्त मंत्री हैं, परंतु अर्थनीति में उनका योगदान क्या है?'
मौजूदा सरकार विशेषज्ञों की सुनने की मन:स्थिति में नहीं है और देश की अर्थव्यवस्था अर्थात उनकी नजर में शेयर बाजार का ‘सट्टा’ हो गया है. निर्मला सीतारामण देश की वित्तमंत्री हैं, परंतु अर्थनीति में उनका योगदान क्या है? ‘मैं प्याज नहीं खाती, तुम भी मत खाओ’ यह उनका ज्ञान है. शासकों को अपनी मुट्ठी में रहने वाले वित्तमंत्री, रिजर्व बैंक के गवर्नर, वित्त सचिव, नीति आयोग के अध्यक्ष चाहिए, और यही अर्थव्यवस्था की बीमारी की जड़ है.
नोटबंदी से अर्थव्यवस्था को नुकसान
शिवसेना ने कहा कि आज देश की अर्थव्यवस्था खस्ताहाल है. इसके पीछे नाकाम नोटबंदी का निर्णय मूल कारण है. गिने-चुने उद्योगपतियों के लिए अर्थव्यवस्था का इस्तेमाल किया जा रहा है. बुलेट ट्रेन जैसी परियोजनाओं पर बेवजह जोर देकर आर्थिक भार बढ़ाया जा रहा है. सत्ताधारी पार्टी को भारी चंदा देनेवालों की सूची सामने आई तो अर्थव्यवस्था में दीमक लगने की वजह सामने आती है. अधिकार शून्य वित्तमंत्री और वित्त विभाग के कारण देश की नींव ही कमजोर होती है. पंडित नेहरू और उनके सहयोगियों ने 50 वर्षों में जो कमाया उसे बेचकर खाने में ही फिलहाल खुद को श्रेष्ठ माना जा रहा है.