रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण अगले हफ्ते रूस की यात्रा पर जा रही हैं. इस यात्रा के दौरान उनका जोर भारत के पुराने दोस्त रूस से करीब 4,000 करोड़ रुपये के एस-400 मिसाइल सौदे को अंतिम रूप देने पर होगा.
चीन से जुड़ी करीब 4 हजार किमी लंबी सीमा पर अपनी सैन्य ताकत बढ़ाने के प्रयासों को देखते हुए भारत के लिए यह रक्षा सौदा काफी अहम है. भारत, असल में इस मामले में चीन से बराबरी हासिल करने के लिए एस-400 मिसाइल हासिल करना चाहता है. चीन ने सबसे पहले रूस से इस मिसाइल के लिए सौदा किया है. सूत्रों के मुताबिक रूस ने अब चीन को इस मिसाइल की आपूर्ति करनी शुरू कर दी है.
गौरतलब है कि रक्षा मंत्री के रूप में निर्मला सीतारमण की यह पहली यात्रा है. सीतारमण एस-400 ट्राइअम्फ एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम के डील को अंतिम रूप देना तो चाहेंगी ही, साथ ही वह परमाणु पनडुब्बी खरीदने के मामले में बने गतिरोध को भी दूर करना चाहेंगी.
एस-400 मिसाइल सिस्टम को खरीदने पर बातचीत करीब डेढ़ साल से चल रही है. रक्षा मंत्री को एस-400 की कीमतों के मामले में बने मतभेदों को दूर करना होगा. इस एंटी-एयरक्राफ्ट सिस्टम में एक साथ चार मिसाइलों का इस्तेमाल होता है.
एस-400 असल में इसके पहले आए एस-300 मिसाइल प्रणाली का उन्नत संस्करण है. इसे रूस का सबसे उन्नत लॉन्ग रेंज सतह से हवा में मार करने वाला मिसाइल डिफेंस सिस्टम माना जाता है और यह साल 2007 से सेवा में हैं.
अब बदली हुई परिस्थितियों में रूस और भारत के बीच पहले जैसी गाढ़ी मित्रता नहीं रह गई है और अब भारत एवं अमेरिका करीब हो रहे हैं. दूसरी तरफ, रूस की पाकिस्तान से करीबी बढ़ रही है.
एक पूर्व भारतीय राजदूत कहते हैं, 'क्षेत्रीय मसलों पर दोनों देशों के बीच बना मतभेद कम हो चुका है. रूस की पाकिस्तान से करीबी बढ़ रही है, यहां तक कि वह तालिबान को हथियार दे रहा है. लेकिन राजनीतिक स्तर पर देखें तो रूसी राष्ट्रपति व्लादीमीर पुतिन और पीएम मोदी के बीच बेहतरीन रिश्ते हैं. हम उम्मीद कर सकते हैं कि चीजें सुधरेंगी.'
पीएम मोदी ने पिछले साल रूस का दौरा किया था और दोनों देशों ने दो नए न्यूक्लियर पावर प्लांट बनाने पर सहमति जताई है.