भूमि अधिग्रहण विधेयक के मुद्दे पर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी आमने-सामने आ गए हैं. सोमवार को सोनिया गांधी पर निशाना साधते हुए बीजेपी नेता नितिन गडकरी ने उन पर देश को गुमराह करने का आरोप लगाया.
केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने सोमवार को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से आग्रह किया कि वे भूमि विधेयक पर राजनीति न करते हुए राष्ट्रहित में उसे पारित कराने में सरकार का सहयोग करें. उन्होंने सोनिया गांधी को खुली बहस की चुनौती दी है, ताकि देश के सामने सारी स्थिति साफ हो जाए.
गडकरी को मोदी ने भूमि विधेयक पर विपक्षी पार्टियों को मनाने का जिम्मा सौंपा है. इसी क्रम में सोनिया गांधी को लिखे पत्र में उन्होंने कहा, 'मेरा मानना है कि इस तरह के महत्वपूर्ण मुद्दों पर राष्ट्रहित को ध्यान में रखते हुए काम करना चाहिए न कि राजनीतिक आधार पर.' पत्र में उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व में कांग्रेस के नेतृत्व वाली UPA सरकार ने ऐसा कानून बनाया था जिसमें निजी क्षेत्रों के लिए भूमि अधिग्रहण के प्रावधान सरल थे किंतु सार्वजनिक क्षेत्रों के लिए कठिन.
गडकरी ने पूछा, 'संप्रग सरकार के कानून में अनुछेद 105 के तहत बड़े पैमाने पर भूमि अधिग्रहण को समाजिक प्रभाव के मूल्यांकन के दायरे से बाहर क्यों रखा गया है.' उन्होंने आरोप लगाया कि संप्रग सरकार ने जानबूझकर इस तरह की व्यवस्था की थी. उन्होंने पूछा, 'क्या आपने ऐसा निजी क्षेत्र की कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए किया था.'
उन्होंने कहा, 'आपके भूमि अधिग्रहण कानून के अंतर्गत हजारों हेक्टेयर भूमि कोयला ब्लॉक के नाम पर अधिग्रहित की जा सकती थी वह भी बिना किसी सामाजिक आकलन के, लेकिन अगर राज्य सरकार स्कूल अथवा सड़क अथवा सिंचाई परियोजना के लिए एक हेक्टेयर भी भूमि चाहती है तो उन्हें एक लंबे और कठिन प्रक्रिया से गुजरना होता था.'
दरअसल गडकरी को लिखे पत्र में सोनिया ने बातचीत का गडकरी का प्रस्ताव ठुकरा दिया था और कहा था कि यह मजाक है और बीजेपी सरकार ने एकपक्षीय तरीके से भूमि अध्यादेश लागू किया. विधेयक को किसान विरोधी बताते हुए सोनिया ने आरोप लगाया था कि सरकार उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाने के लिए पूरी तरह समर्पण कर रही है. इस आरोप का जवाब देते हुए गडकरी ने कहा, 'पिछली सरकार ने जानबूझकर एक व्यवस्था बनाई जिसमें बड़ी भूमि अधिग्रहण परियोजनाएं आकलन के बाहर थीं जबकि राज्य सरकार द्वारा संचालित कल्याण परियोजनाएं इसमें फंसी हुई थीं.'