आईपीएल स्पॉट फिक्सिंग मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने एन श्रीनिवासन की जगह लिटिल मास्टर सुनील गावस्कर को बीसीसीआई का अंतरिम प्रेसीडेंट बनवा तो दिया, लेकिन आलोचकों का कहना है कि उनका भी रिकॉर्ड कोई बहुत शानदार नहीं है.
आर्थिक समाचार पत्र द इकोनॉमिक टाइम्स ने लिखा है कि गावस्कर भी कई विवादों में फंस चुके हैं और उनके भी हितों का टकराव होता रहा है. वे पाक साफ नहीं कहे जा सकते हैं.
कमेंटेटेर
अखबार ने लिखा है कि गावस्कर का बीसीसीआई के साथ कमेंट्री के लिए कॉन्ट्रैक्ट है और इसके लिए उन्हें हर साल 3.6 करोड़ रुपये मिलते हैं. गावस्कर शीर्ष कमेंटेटरों में गिने जाते हैं. अब सुप्रीम कोर्ट ने कह दिया है कि जब तक वह अंतरिम प्रेसीडेंट रहेंगे वे कमेंट्री नहीं करेंगे, लेकिन बीसीसीआई इसके एवज में उन्हें उचित पारिश्रमिक देगा.
टैलेंट मैनेजमेंट
गावस्कर स्पोर्टेस मार्केटिंग एजेंसी प्रोफेशनल मैनेजमेंट ग्रुप (पीएमजी) के संस्थापकों में से हैं. यह कंपनी वीरेंद्र सहवाग, मनोज तिवारी और वरुण आरों जैसे खिलाड़ियों को मैनेज करती है. इसके अलावा यह ईफीएल के अवार्ड फंक्शन का भी आयोजन करती है. इसने कई प्रायोजकों के लिए आईपीएल से संबिधित कई कार्यक्रम भी किए हैं.
विवाद
2010 में गावस्कर ने आईपीएल गवर्निंग काउंसिल के सदस्य का पद छोड़ दिया था. उन्होंन दावा किया था कि बीसीसीआई पर उनके करोड़ों रुपये बकाया हैं. दिलचस्प बात यह है कि वह पद मानद था.
2008 में गावस्कर ने प्रतिष्ठित आईसीसी की क्रिकेट कमिटी के चेयरमैन का पद छोड़ दिया था. उन पर आरोप लगा था कि वह टीवी कमेंट्री भी कर रहे हैं.
1999 में बांबे जिमखाना क्लब के एक लॉकर में लाखों रुपए और विदेशी मुद्रा पाई गई. वह लॉकर गावस्कर का था.
1981 में गावस्कर अंपायर के एक फैसले से इतने नाराज हुए कि वह अपने साथी सलामी बल्लेबाज चेतन चौहान के साथ एमसीजी मैदान का वॉक आउट कर गए थे.
अंग्रेजी अखबार हिन्दुस्तान टाइम्स ने लिखा है कि राजसिंग डूंगरपुर ने उनके रवैये की आलोचना की थी. उन्होंने गावस्कर पर दोमुंहा बर्ताव का आरोप लगाया था.
अखबार ने यह भी लिखा है कि गावस्कर एनआरआई हैं और वे यूएई के नागरिक हैं. वहां 16 अपैल से आईपीएल खेला जाएगा.