वर्क फ्रॉम होम या वर्क फ्रॉम चैंबर के बावजूद सुप्रीम कोर्ट के वकील आजकल आपस में अठन्नी यानी पचास पचास पैसे जमा कर रहे हैं. ये अपने साथी वकील का जुर्माना भरने के लिए ऐसा कर रहे हैं. यह जुर्माना सुप्रीम कोर्ट ने लगाया है. शीर्ष कोर्ट द्वारा लगाया गया 100 रुपये का जुर्माना प्रतीकात्मक है, तो उसकी भरपाई भी वैसे ही सामूहिक रूप से जा रही है.
इस जुर्माने को भरने के लिए 200 वकीलों से पचास पैसे के 200 सिक्के जमा किए जा रहे हैं. अब तक 75 सिक्के यानी 100 रुपये की जुर्माना राशि में से 37.50 रुपये जमा हो चुके हैं. जब 200 सिक्के यानी 100 रुपये इकट्ठे हो जाएंगे, तो रेजगारी के रूप में ही वो रकम सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री में जमा की जाएगी.
दरअसल, शीर्ष अदालत ने जुर्माना लगाया है, तो वहां ज़्यादा विरोध हो नहीं सकता है. हालांकि इस जुर्माने की अलग अंदाज में अदायगी के जरिए और अलग नजरिए से विरोध जताया जा सकता है. लिहाजा वकील इस तरह करके सांकेतिक विरोध जता रहे हैं.
अब इसके पीछे का किस्सा भी समझ लीजिए. सुप्रीम कोर्ट के एक वकील रीपक कंसल पर कोर्ट ने 100 रुपये का जुर्माना लगाया. यह सांकेतिक जुर्माना जस्टिस अरुण मिश्रा, जस्टिस एस. अब्दुल नज़ीर और जस्टिस एम. आर. शाह की बेंच ने रीपक कंसल की याचिका में लगाए गए आरोपों को खारिज करते हुए लगाया.
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वकील रीपक कंसल ने सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री पर आरोप लगाया था कि रजिस्ट्री कुछ मुकदमों को सूचीबद्ध करने के मामले में भेदभाव और अनुचित प्राथमिकताएं दिखा रहा है. रीपक कंसल ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि सुप्रीम कोर्ट के सेक्शन ऑफिसर और रजिस्ट्री नियमित रूप से कुछ लॉ फर्म, प्रभावशाली वकीलों और उनके मुकदमों को ‘वीवीआइपी ट्रीटमेंट’ देते हैं, जो सुप्रीम कोर्ट में न्याय पाने के समान अवसर के खिलाफ है.
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कोर्ट से मांग की गई थी कि सुनवाई के लिए मामलों को सूचीबद्ध करने में ‘पिक एंड चूज’ नीति न अपनाई जाए और रजिस्ट्री को निष्पक्षता व समान व्यवहार का निर्देश दिया जाए. कोर्ट ने खफा होकर जुर्माना लगाया, तो वकीलों ने भी तेवर दिखा दिए. वकील जुर्माना तो भरेंगे, लेकिन सबको बताते और विरोध जताते हुए.