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SC में सिंघवी ने बताया- चिदंबरम के खिलाफ बैकडेट में जाकर लगाया नया कानून

अपनी दलील रखते हुए अभिषेक मनु सिंघवी ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि पी. चिदंबरम पर जो केस चल रहा है, वह शुरू से ही गलत है. पूर्व वित्त मंत्री के वकील की तरफ से कहा गया कि ईडी ने पी. चिदंबरम के पुराने मामले में वो कानून लगाया जो उस वक्त था ही नहीं.

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पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम (फाइल फोटो)
पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम (फाइल फोटो)

  • सुप्रीम कोर्ट में INX मीडिया केस में सुनवाई
  • ED के आरोपों का जवाब दे रहे पी. चिदंबरम के वकील
  • अभिषेक मनु सिंघवी ने PMLA एक्ट पर खड़े किए सवाल

सुप्रीम कोर्ट में INX मीडिया मामले में सुनवाई जारी है. मंगलवार को सर्वोच्च अदालत में प्रवर्तन निदेशालय (ED) मामले में सुनवाई हुई, इस दौरान पी. चिदंबरम के वकील कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी ने दलीलें दीं और ईडी के आरोपों का जवाब दिया. अपनी दलील रखते हुए अभिषेक मनु सिंघवी ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि पी. चिदंबरम पर जो केस चल रहा है, वह शुरू से ही गलत है. पूर्व वित्त मंत्री के वकील की तरफ से कहा गया कि ईडी ने पी. चिदंबरम के पुराने मामले में वो कानून लगाया जो उस वक्त था ही नहीं.

मंगलवार की पूरी सुनवाई यहां पढ़ें...

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सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में सिंघवी ने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय के द्वारा कहा गया है कि FIPB ने अप्रूवल 2007 में दिया, रेवन्यू डिपार्टमेंट ने 2008 में नोट लिया. FIPB ने बाद में 2008 में क्लीयेरेंस लिया, लेकिन उससे पहले कुछ नहीं था. अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि ये केस शुरू से ही गलत चल रहा है.

अदालत में सिंघवी ने बताया कि FIR के मुताबिक केस 15 मई 2009 को रजिस्टर हुआ. इसके अलावा PMLA एक्ट भी जुलाई 2009 में शेड्यूल हुआ. उन्होंने कहा कि जब कानून कथित अपराध होने के बाद में बना है, तो फिर वह पहले से क्यों लागू हो रहा है. दरअसल, अपनी बात रखते हुए कोर्ट में अभिषेक मनु सिंघवी PMLA एक्ट पर बहस करने लगे.

अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि PMLA एक्ट तो कम से कम 30 लाख की रिश्वत में रहता है, लेकिन इस मामले में तो 10 लाख की रिश्वत के आरोप लगे हैं. उन्होंने कहा कि जो कानून इसमें लगाया गया है वो कथित क्राइम होने के बाद बना है, ऐसे में ये गलत नीति है.

पी. चिदंबरम के वकील ने कहा कि संवैधानिक कानून कहता है कि किसी व्यक्ति पर उस अपराध का आरोप नहीं लगाया जा सकता है जो अपराध के घटने के समय अपराध नहीं था. इसके अलावा न ही उसे अपराध के लिए निर्धारित से अधिक सजा दी जा सकती है. सिंघवी ने दलील दी कि जब आपातकाल की घोषणा हो तब भी अनुच्छेद 20, 21 बने रहते हैं.

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