कालाधन और दिल्ली में सरकार निर्माण के बाद सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एक बार फिर केंद्र सरकार को फटकार लगाई है. इस बार की डांट गंगा सफाई को लेकर है. मामले केंद्र सरकार, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और राज्यों के प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड्स को कोर्ट की नाराजगी का सामना करना पड़ा है. कोर्ट ने गंगा तटों पर सक्रिय, प्रदूषण फैलाने वाली औद्योगिक इकाइयों के खिलाफ कार्रवाई न करने के लिए केंद्र सरकार और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों की खिंचाई की है.
कोर्ट ने राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों से कहा कि यह मामला पूरी तरह असफलता और निराशा की कहानी है. कोर्ट ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि अगर आप लोगों के भरोसे रहे तो गंगा में प्रदूषण फैलाने वाली इंडस्ट्रीज के खिलाफ कार्रवाई करने में 50 साल और लग जाएंगे. मामले की सुनवाई कर रही तीन जजों वाली जस्टिस टीएस ठाकुर की बेंच ने निर्देश दिया कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों की नाकामी को देखते हुए 17 बेहद अधिक प्रदूषण फैलाने वाली इंडस्ट्रीज पर अब नेश्नल ग्रीन ट्रिब्यूनल नजर रखेगा. कोर्ट ने कहा कि ट्रिब्यूनल में एक्सपर्ट्स की टीम है, जो ऐसी इंड्सट्रीज़ पर नजर रखेंगें और गंगा में इनसे होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाएंगे.
इसके साथ ही कोर्ट ने निर्दश दिया है कि ग्रीन ट्रिब्यूनल हर 6 महीने में अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को देगा. कोर्ट ने साफ किया कि शहरों और कस्बों से गंगा में गिरने वाली गंदगी के मामलों पर वो खुद सुनवाई करेगा. सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई 10 दिसंबर को होगी. कोर्ट उस दिन शहरों और कस्बों से गंगा में आने वाली गंदगी को रोकने के लिए नगर निगमों के लिए निर्दश जारी करेगा.