दिल्ली की एक अदालत ने 10 साल के एक लड़के को फिरौती के लिए अगवा करने और उसकी हत्या करने के मामले में तीन लोगों को उम्रकैद की सजा सुनायी है. अदालत ने सजा सुनाते हुए यह भी कहा कि अपराधियों के लिए यह धंधा बन गया है.
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विनोद कुमार ने कहा, ‘‘फिरौती के लिए अपहरण करना फूलता फलता धंधा बन गया है और अकसर ऐसे मामलों में अपहृत को मार दिया जाता है. बच्चे आसानी से ऐसे अपराधों का शिकार हो जाते हैं.’’ उन्होंने कहा, ‘‘अपहृत लोगों की मौत से साक्ष्य खत्म हो जाते हैं, जिसके चलते अपराधी कानून के शिकंजे से बच जाता है.’’
अदालत ने लड़के के अपहरण और हत्या के मामले में भारतीय दंड संहिता के तहत राजेंद्र कुमार, राज कुमार और मुरारी को दोषी ठहराया और उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाने के साथ-साथ प्रत्येक पर दो-दो हजार रुपये का जुर्माना लगाया. सजा के फैसले पर दलीलों के दौरान सरकारी वकील अल्का गोयल ने दोषियों के लिए मौत की सजा की मांग की.
दूसरी तरफ आरोपियों के वकील ने इस आधार पर अदालत के नरम रवैये की मांग की कि दोषियों का यह पहला अपराध है और परिस्थितिजन्य साक्ष्य पर ही मामला आधारित है.
हालांकि अदालत ने दोषियों को मौत की सजा नहीं सुनाते हुए उम्रकैद दी. अदालत ने यह भी कहा कि अपहरण और हत्या के मामले में तीनों दोषियों को दो-दो उम्रकैद की सजा एक के बाद एक दी जाएगी, न कि एक साथ.