देश में पिछले तीन साल में कुल 14 लाख 46 हजार 985 सड़क हादसे हुए हैं. देश के सभी राज्यों की पुलिस से मिले इन आंकड़ों को केंद्र सरकार ने संसद में जारी किया है. सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने लोकसभा में बताया है कि हादसों को रोकने के लिए सड़क सुरक्षा एडवोकेसी पर जोर दिया जा रहा. इसके लिए कुल 203 एनजीओ को जागरुकता फैलाने की जिम्मेदारी दी गई है. एनजीओ को आर्थिक मदद भी दी जा रही है.
लोकसभा में पूछे गए एक सवाल के जवाब में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने वर्षवार हुए हादसों की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि 2015 में कुल पांच लाख एक हजार 23, 2016 में चार लाख 80 हजार 652 और 2017 में चार लाख 64 हजार 910 सड़क हादसे हुए. सरकार ने बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन(डब्ल्यूएचओ) की सड़क सुरक्षा 2018 पर आई रिपोर्ट के अनुसार, भारत उन अग्रणी देशों में से एक है, जहां सड़क दुर्घटनाओं की संख्या अधिक है.
हादसे रोकने के लिए क्या कर रही सरकार
लोकसभा में नितिन गडकरी ने बताया कि सड़क सुरक्षा के लिए जागरुकता उपायों पर जोर दिया जा रहा है. इसके लिए 2016-17 में 50 करोड़, 2017-18 में 75 करोड़ और 2018-19 मे 80 करोड़ रुपये बजट की व्यवस्था हुई. मंत्रालय ने पिछले वित्तीय वर्ष 2017-18 में सड़क सुरक्षा एडवोकेसी के संचालन के लिए एनजीओ को आर्थिक मदद देने की योजना शुरू की है. इस योजना के तहत 203 एनजीओ के जरिए सड़क सुरक्षा एडवोकेसी कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं. सरकार के आंकड़ों के मुताबिक सबसे ज्यादा 108 एनजीओ उत्तर प्रदेश में काम कर रहे हैं.
मोबाइल एप पर दें हादसों की सूचना
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने लिखित जवाब में बताया कि सरकार ने यात्रियों के लिए एक मोबाइल ऐप शुरू किया है. जिसका नाम सुखदयात्रा है. 1033 पर फोन कर दुर्घटनाओं सहित राष्ट्रीय राजमार्गों के गड्ढों और अन्य सुरक्षा खतरों की शिकायत कर सकते हैं. उन्होंने बताया कि अभिनेता अक्षय कुमार को रोड सेफ्टी के लिए ब्रांड एम्बेसडर भी बनाया गया है.
सरकार का कहना है कि ऑटो मोबाइल सुरक्षा मानकों को बेहतर बनाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं. सरकार ने सड़क हादसों में कमी आने की भी बात कही. बताया कि कैलेंडर वर्ष 2017 के आंकड़ों से पता चलता है कि 2016 की तुलना में 2017 में सड़क दुर्घटनाओं की संख्या में 3.3 प्रतिशत की गिरावट और चोटों की संख्या में 4.8 प्रतिशत की कमी आई थी.
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