उग्रवादी घटनाएं: जीरो, हत्या: जीरो, घायल: जीरो, सुरक्षाकर्मियों की हत्या: जीरो, अपहरण: जीरो, मुठभेड़: जीरो...जी हां, जून 2015 तक का ये आंकड़ा त्रिपुरा का है. इसे मुख्यमंत्री मनिक सरकार ने पूर्वोत्तर राज्य के मुख्यमंत्रियों के एक सम्मेलन के दौरान पेश किया है. उनका कहना था कि राज्य से अफ्सपा वापस लेने के बाद आतंकवाद संबंधित घटनाओं में अप्रत्याशित कमी आई है.
उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में उग्रवाद से निपटने में अच्छी सफलता मिली है. आंकड़े इस बात के गवाह है कि इस वर्ष पिछले 10 वर्षों की अपेक्षा सबसे कम घटनाएं हुई हैं. विद्रोही गुटों की ताकत में काफी कमी आई है. वर्तमान में त्रिपुरा में विद्रोहियों का कोई ठिकाने नहीं है. पूर्वोत्तर राज्यों में विद्रोही गतिविधियां बने रहने का प्रमुख कारण कम विकास एवं पिछड़ापन है.
सरकार ने कहा कि ब्रिटिश शासन के दौरान इस क्षेत्र के विकास के लिए शायद ही कोई ध्यान दिया गया हो. दुखद है कि आजादी के बाद पिछले 68 सालों में केन्द्र सरकार का रवैया भी बहुत उत्साहजनक नहीं रहा है. विद्रोही गतिविधियां उपरी तौर पर एक सुरक्षा समस्या नजर आए, लेकिन इसकी जड़े गरीबी और असंतोष हैं. इसके साथ विभिन्न ऐतिहासिक एवं राजनीतिक कारण हैं.
अफ्सपा को वापस लेने की वकालत
केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा पूर्वोत्तर में केंद्रीय बलों की तैनाती में कमी लाए जाने की संभावना जताने के बाद एमनेस्टी इंटरनेशनल ने कहा कि उसे पूर्वोत्तर राज्यों में सशस्त्र बल कानून (AFSPA) का प्रयोग करने पर पुनर्विचार करना चाहिए. मीडिया अधिकारी हिमांशी मत्ता ने कहा कि 11 जुलाई को केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने पूर्वोत्तर राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक में केंद्रीय बलों की तैनाती में कमी किए जाने की संभावना व्यक्त की थी.
नहीं हुई अफ्सपा पर चर्चा
उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में सुरक्षा की स्थिति में सुधार आया है. चिंता की बात यह है कि अफ्सपा पर चर्चा नहीं हुई जो पूर्वोत्तर के कई राज्यों में लागू है. यौन हमले के खिलाफ कानूनों की समीक्षा के लिए गठित न्यायमूर्ति वर्मा आयोग ने कहा था कि अफ्सपा यौन हिंसा के लिए छूट को कानूनी रूप देता है. न्यायमूर्ति संतोष हेगड़े आयोग ने इस कानून को दमन का प्रतीक बताया था.
सुरक्षा बलों की तैनाती पर जताई चिंता
केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने पूर्वोत्तर में व्यापक पैमाने पर सुरक्षा बलों की तैनाती पर चिंता जताई. मुख्यमंत्रियों से उनके राज्यों में सुरक्षा बलों की तैनाती के लिए वास्तविक स्थिति का पता लगाने के लिए कहा. उन्होंने आश्वस्त किया कि सुरक्षा बलों की तैनाती तभी होगी, जब उनकी वास्तव में जरूरत होगी. सुरक्षा से समझौता किए बिना सुरक्षा बलों की तैनाती में कमी की जरूरत है.