राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने साल 2008 के मालेगांव बम विस्फोट मामले में दो फरार आरोपियों का जिक्र आरएसएस कार्यकर्ता के रूप में किया है. एजेंसी ने अपने आरोपपत्र में राम चंद्र कालसंग्र और संदीप डांगे को संघ का कार्यकर्ता बताया है.
आरोपपत्र में कालसंग्र को आरोपी नंबर-13 और डांगे को आरोपी नंबर-14 बताया गया है. जबकि पेशा वाले कॉलम में दोनों का जिक्र ‘आरएसएस कार्यकर्ता’ के रूप में किया है. विस्फोटों के सिलसिले में इनके नाम आने के बाद से दोनों लोग फरार हैं. दोनों को अन्य मामलों में भी आरोपी नामजद किया गया है, जिनमें 2007 में हुआ समझौता ट्रेन विस्फोट भी शामिल है. इसमें 68 लोग मारे गए थे.
'RSS को दोनों का अता-पता नहीं'
मालेगांव आरोपपत्र में अपने कार्यकर्ताओं का नाम आने पर टिप्पणी करते हुए संघ संचार विभाग प्रमुख मनमोहन वैद्य ने कहा, 'वे लोग आरएसएस के साथ थे. हमें उनका अता-पता नहीं हैं. ना ही हम मामले में उनकी संलिप्तता के बारे में जानते हैं.' वैद्य ने आगे कहा, 'हम किसी भी तरह की हिंसा का समर्थन नहीं करते. लेकिन पूरी घटना की एक गहन न्यायिक जांच होनी चाहिए और दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को दंडित किया जाना चाहिए.'
सूचना देने पर 10 लाख का इनाम
सीबीआई ने कालसंग्र और डांगे को भगोड़ा घोषित कर रखा है और एनआईए ने उनकी गिरफ्तारी कराने वाली कोई सूचना देने पर 10 लाख रुपये के इनाम की घोषणा की है. उनके खिलाफ इंटरपोल का एक रेड कॉर्नर नोटिस भी जारी है.
आरोपियों को प्रशिक्षण देने का आरोप
एनआईए के आरोपपत्र के मुताबिक, दोनों लोगों के कुछ परिचितों और सहयोगों से पूछताछ की गई. इस दौरान एजेंसी ने आरोप लगाया कि मालेगांव विस्फोट के समय जिन मोबाइल फोन नंबरों का पता लगाया गया उन्हें आरोपी ने इस्तेमाल किया था. कालसंग्र उर्फ रामजी और डांगे पर आरोप है कि उन्होंने मध्य प्रदेश के देवास में बागली हिल टॉप पर कुछ आरोपियों को हथियार और विस्फोटक का प्रशिक्षण दिया था.
मालेगांव ब्लास्ट में मारे गए थे 7 लोग
एनआईए ने बताया कि 29 सितंबर 2008 को मालेगांव स्थित एक मस्जिद के बाहर जिस दो पहिया वाहन में विस्फोटक रखे गए थे, उसे कालसंग्र पिछले दो साल से इस्तेमाल कर रहा था. यह वाहन साध्वी प्रज्ञा ठाकुर के नाम से पंजीकृत है, जिन्हें एनआईए ने क्लीन चिट दे दी है. 2008 के मालेगांव विस्फोट में सात लोग मारे गए थे.