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पश्चिम बंगाल पंचायत चुनाव: निर्विरोध उम्मीदवारों की जीत पर SC हैरान, चुनाव आयोग से मांगा ब्यौरा

पश्चिम बंगाल में इस साल मई में ग्राम पंचायत, जिला परिषद और पंचायत समिति की 58692 सीटों के लिये हुये चुनाव में 20,159 पर चुनाव लड़ा ही नहीं गया. इन चुनावों में काफी हिंसा हुयी थी. चुनाव में टीएमसी के कई उम्मीदवार निर्विरोध जीते थे.

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सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो)
सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो)

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सुप्रीम कोर्ट मंगलवार को शांति पूर्ण पंचायत चुनाव न करा पाने को लेकर पश्चिम बंगाल सरकार को फटकार लगाई है. कोर्ट यह जानकर हैरान हुआ कि पंचायत चुनावों में हजारों सीटों पर चुनाव ही नहीं लड़ा गया. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इन आंकड़ों से पता चलता है कि निचले स्तर पर लोकतंत्र काम नहीं कर रहा है.

कोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग को ऐसी सीटों के सही आंकड़े मुहैया कराने के निर्देश भी दिए हैं. पश्चिम बंगाल में इस साल मई में ग्राम पंचायत, जिला परिषद और पंचायत समिति की 58692 सीटों के लिये हुये चुनाव में 20,159 पर चुनाव लड़ा ही नहीं गया. इन चुनावों में काफी हिंसा हुयी थी. चुनाव में टीएमसी के कई उम्मीदवार निर्विरोध जीते थे.

परेशान है सुप्रीम कोर्ट

चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस एके खानविलकर और जस्टिस धनन्जय वाई चन्द्रचूड़ की पीठ ने कहा, ‘हम इस तथ्य के प्रति बेखबर नहीं रह सकते कि राज्य में पंचायत चुनावों में इतनी बड़ी संख्या में सीटों पर चुनाव लड़ा ही नहीं गया. हमें यह बात परेशान कर रही है कि 48,000 ग्राम पंचायतों में 16,000 से अधिक निर्विरोध रहीं.’पीठ ने कहा कि जिला परिषद और पंचायत समितियों की सीटों के लिये हुये चुनावों की भी यही स्थिति रही है.

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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह विस्मित करने वाला है कि हजारों सीटें निर्विरोध रहीं. ये आकंड़े यही दर्शाते हैं कि निचले स्तर पर लोकतंत्र ठीक से काम नहीं कर रहा है. पीठ ने पश्चिम बंगाल राज्य चुनाव आयोग को बुधवार तक एक हलफनामा दाखिल कर उन सीटों का सही ब्यौरा मुहैया कराने के लिए कहा है  जिन पर चुनाव ही नहीं लड़ा गया.

चुनाव में हुई गड़बड़

सुप्रीम कोर्ट ने राज्य चुनाव आयोग के फैसलों पर सवाल उठाये और कहा कि पहले उसने नामांकन पत्र दाखिल करने की समय सीमा बढ़ाई और एक दिन के भीतर ही अपना आदेश वापस ले लिया. पीठ ने कहा, ‘राज्य चुनाव आयोग कानून के अभिरक्षक हैं. यह विचित्र है कि इतनी अधिक सीटों पर चुनाव ही नहीं लड़ा गया. अगर कोई भी चुनाव नहीं लड़ रहा है तो फिर इसे लेकर कोई मुकदमा भी नहीं होगा जबकि हकीकत यह है कि इसे लेकर मुकदमे हुये और इसका मतलब है कि कुछ न कुछ गड़बड़ होने के तथ्य के प्रति सभी जानते थे.

बीजेपी की पश्चिम बंगाल इकाई की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता पीएस पटवालिया ने कहा कि चुनाव के दौरान हिंसक घटनायें हुईं और लोगों को नामांकन पत्र ही दाखिल नहीं करने दिये गये. उन्होंने जिलेवार उन सीटों का विवरण दिया जिन पर चुनाव लड़ा ही नहीं गया.

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सीपीएम और बीजेपी ने आरोप लगाया था कि उनके दलों के अनेक उम्मीदवारों को नामांकन पत्र दाखिल नहीं करने दिया गया जिसकी वजह से सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के करीब 34 प्रतिशत प्रत्याशी निर्विरोध जीते हैं.

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