राजनीति के 'खुला खत' दौर में नीतीश कुमार के खत का जवाब आया है. यह जवाब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नहीं, केंद्रीय मंत्री और बिहार में बीजेपी के अहम नेता गिरिराज सिंह ने दिया है. उन्होंने प्रदेश की जनता के नाम एक 'खुला खत' लिखकर नीतीश-लालू को अवसरवादी बताया है.
गिरिराज ने लालू यादव के नीतीश के बारे में कहे गए सालों पुराने बयानों को खोजकर इस चिट्ठी में शामिल किया है. उन्होंने कहा कि जो लालू कभी नीतीश घटिया, गिरगिट की तरह रंग बदलने वाले, अहंकारी और महाठग कहा करते थे, वही अब उनके दोस्त बन बैठे हैं. उन्होंने पुराने बयानों को सामने रखकर लालू और नीतीश की पुरानी सियासी अदावत को भी याद दिलाने की कोशिश की.
'नीतीश को पागल तक कह चुके हैं लालू'
उन्होंने लिखा है, 'सवाल-जवाब ठीक से हो, इसलिए याद दिलाना जरूरी है कि दोनों मित्रों ने एक-दूसरे को कब क्या कहा. जेडीयू के एनडीए से अलग होने के बाद आरजेडी में फूट की खबर आई. लालू प्रसाद जी को लगा कि इसमें सत्ता पक्ष का हाथ है. उन्होंने कहा- ये नीतीश कुमार इतना घटिया, स्कैंडलस है, माईनॉरिटी में चला गया है, डायवर्स होने के बाद ये पागल हो गया है.'
गिरिराज ने लिखा है , 'नीतीश कुमार के डीएनए यानी मूल प्रवृत्ति के बारे में लालू प्रसाद ने कहा था- 'जिस तरह गिरगिट रंग बदलता रहता है, वैसे ही नीतीश कुमार समय-समय पर सुविधा के ख्याल से रंग बदलते रहते हैं.'
'खुद किसकी गोद में बैठे हैं नीतीश?'
इतना ही नहीं, गिरिराज ने लालू का वह बयान भी याद दिलाया जिसमें उन्होंने नीतीश पर एनडीए का पीएम उम्मीदवार बनने का सपना देखने का आरोप लगाया था. उन्होंने आगे लिखा, 'लालू जी ने कहा था कि बीजेपी और आरएसएस के लोग जल्दी से उन्हें (नीतीश को) अगला प्रधानमंत्री डिक्लेयर करें. ज्यों ही डिक्लेयर किया जाएगा, मोदी भी पसंद, तोगड़िया भी पसंद, ठाकरे भी पसंद. नीतीश कुमार को इन चीजों से कोई परहेज नहीं होगा. तो असली बीमारी यहां है कि नीतीश कुमार देश का प्रधानमंत्री बनना चाहते हैं. क्यों ढोंग करते हो.'
गिरिराज ने लिखा, 'नीतीश लालू को बड़बोला और कांग्रेस की गोद में खेलने वाला बताते रहे हैं, लेकिन आज वो खुद किसकी गोद में बैठे हैं? 6 अक्टूबर 2012 को नीतीश कहते हैं कि 15 साल के पति-पत्नी (श्री लालू प्रसाद जी और श्रीमती राबड़ी देवी) की सरकार ने बिहार को बर्बाद करके रख दिया. क्या नीतीश बिहार को एक बार फिर बर्बादी के उन्हीं दिनों की ओर नहीं धकेल रहे.'