उन्नाव गैंगरेप केस पर कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी ने दुख जताया है. उन्होंने कहा कि मुझे राजनीतिक जीवन का चार दशक का अनुभव है. इतनी हृदय विदारक घटना नहीं सुनी थी.
उन्होंने कहा कि एक लड़की कहती है उसका बलात्कार हुआ है, दर-दर भटकती है. इसके बाद मुख्यमंत्री के दरवाजे पर जाती है. आत्मदाह करने की प्रयास करती है फिर भी सरकार नहीं जागती. यह तो अन्याय है. पीड़िता को न्याय नहीं मिला. वहीं लड़की के पिता के साथ बर्बरता हुई. पैरों से बहता हुआ खून फटी हुई आंत, कितनी यातनाएं दी गई. क्या बेटी का बाप होना बीजेपी की सरकार में गुनाह है?
विधायक कुलदीप सेंगर की गिरफ्तारी पर प्रमोद तिवारी बोले पीड़िता के जो भी मांग है, उस पर कार्रवाई होनी चाहिए.
कुलदीप सेंगर की पत्नी के डीजीपी से मिलने पर प्रमोद तिवारी ने कहा, 'उनकी पत्नी के बारे में मैं जानना नहीं चाहता. हर किसी को अधिकार है अधिकारियों से मिले, मंत्रियों से मिले. उन्हें जो कुछ कहना है कहें. मैं सिर्फ यह जानना चाहता हूं कि क्या बीजेपी के राज्य में दर- दर लड़की भटकती रहे और कहती रहे कि उनके साथ बलात्कार हुआ है. उसे इंसाफ ना मिले. हम किस कानून में हैं. किसकी सरकार में हैं.
वहीं स्वामी चिन्मयानंद से केस वापस लेने के मामले पर प्रमोद तिवारी बोले अब तक यही सुना है कि राजनीतिक मामलों में सब केस वापस लेते हैं. चाहे किसी की भी सरकार हो. लेकिन हत्या, बलात्कार के केस में न्यायालय को फैसला लेने दो.
बीजेपी के उपवास पर प्रमोद तिवारी का कहना है, 'हर धर्म में व्रत रखे जाते हैं. उपवास रखे जाते हैं. अपने पापों के प्रायश्चित करने के लिए बीजेपी ने जो सदन चलाया उसका मैं सदस्य था. सुबह 11:00 बजे क्या होता था. कांग्रेस जब बेल में नहीं जाती थी तो सरकार के सहयोगी दल बेल में आते थे. उसके बाद सदन स्थगित कर दिया जाता था.'