500 और 1,000 रुपये के नोटों को अमान्य घोषित किए जाने के बाद परेशान जनता को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सहारा दिया है. उन्होंने मंगलवार को घोषणा की है कि जमीन के पंजीकरण के लिए अवैध करार दिए जा चुके 500-1000 के नोट 24 नवंबर तक स्वीकार किए जाएंगे. यकीनन उनके इस फैसले से ऐसे लोगों को राहत मिलेगी जो जमीन के सौदे में अपनी जमा पूंजी का कुछ हिस्सा खर्च करने का मन बनाए बैठे होंगे.
देश में नोटबंदी के बाद मची हलचल के बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने विवादित बयान दिया है. उन्होंने कहा कि मंदी में कालाधन ही अर्थव्यवस्था को बचाता है. हालांकि साथ ही उन्होंने कहा कि वो काले धन के खिलाफ हैं. अखिलेश ने कहा कि सरकार ने नोटबंदी को जिस तरह से लागू किया है उससे अर्थव्यवस्था चरमरा जाएगी.
जनता को हुई परेशानी
अखिलेश ने कहा कि सरकार ने नोटबंदी करके जनता को मुश्किल में डाला है. उन्होंने कहा, 'जो सरकारें जनता को दुख देती हैं, जनता उस सरकार को हटा देती है. इस सरकार ने जनता को दुख और परेशानी दी है.'
सरकार ने नहीं की सही तैयारी
मुख्यमंत्री ने कहा कि न सिर्फ राजनीतिक पार्टियां बल्कि जनता भी इसके खिलाफ है क्योंकि सरकार ने नोटबंदी के बाद उत्पन्न होने वाली स्थिति के लिए ठीक ढंग से तैयारी नहीं की थी. उन्होंने कहा कि लोगों को मांग के मुकाबले रुपया कम मिल रहा है और बैंक उन्हें पूरा पैसा उपलब्ध कराने में असमर्थ हैं.
सरकार ने नहीं ली सीख
अखिलेश ने कहा, 'लोग गांवों से आ रहे हैं और उन्हें रुपये नहीं मिल रहे हैं. यूपी में लोगों को रुपये वितरित करने में 6 महीने लगेंगे. पिछली बार जब नोटबंदी हुई थी, तब भी इस तरह की स्थिति बनी थी. सरकार ने पिछली नोटबंदी के बाद की स्थिति से कोई सीख नहीं ली.'
उन्होंने कहा कि बसपा अध्यक्ष मायावती भी इसलिए परेशान हैं क्योंकि उनके काले धन का खुलासा हो गया है.