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'शांतिपूर्ण कांवड़ यात्रा के लिए था आदेश', नेमप्लेट विवाद पर यूपी सरकार की SC में सफाई

उत्तर प्रदेश में कांवड़ यात्रा के रूट पर दुकानदारों और ठेलेवालों को अब अपनी दुकानों के आगे नेमप्लेट लगाने की जरूरत नहीं है. सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है. इस संबंध में यूपी सरकार को नोटिस भी जारी किया गया था. सरकार ने अब सर्वोच्च अदालत में अपना जवाब दाखिल किया है जिसमें कहा गया है कि यह आदेश शांतिपूर्ण कांवड़ यात्रा के संचालन के लिए दिया गया था.

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यूपी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया जवाब
यूपी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया जवाब

उत्तर प्रदेश में कांवड़ यात्रा के रूट पर दुकानदारों और ठेलेवालों को अब अपनी दुकानों के आगे नेमप्लेट लगाने की जरूरत नहीं है. सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है. इस संबंध में यूपी सरकार को नोटिस भी जारी किया गया था. सरकार ने अब सर्वोच्च अदालत में अपना जवाब दाखिल किया है जिसमें कहा गया है कि यह आदेश शांतिपूर्ण कांवड़ यात्रा के संचालन के लिए दिया गया था.

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'सभी की धार्मिक भावनाओं की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध सरकार'

उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि कांवड़ यात्रा के रूट पर नेमप्लेट का आदेश पूरी तरह से कांवड़ यात्रा के शांतिपूर्ण समापन को सुनिश्चित करने के हित में जारी किया गया था, जिसमें सालाना 4.07 करोड़ से अधिक कांवड़िये भाग लेते हैं. 17 जुलाई 2024 का यह आदेश कांवड़ यात्रा के सफल संचालन के लिए कमिश्नर सहारनपुर मंडल की अध्यक्षता में 13 जुलाई 2024 को हुई बैठक पर आधारित था. 

प्रदेश सरकार ने कहा कि वह सभी धर्मों के लोगों की धार्मिक भावनाओं की रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध है. राज्य यह सुनिश्चित करने के लिए हमेशा कदम उठाता है कि सभी धर्मों के त्योहार शांतिपूर्ण ढंग से मनाए जाएं.

'कांवड़ियों के बीच भ्रम से बचने का उपाय'

सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि राज्य द्वारा जारी निर्देश दुकानों और भोजनालयों के नामों के कारण होने वाले भ्रम के संबंध में कांवड़ियों से मिली शिकायतों के जवाब में जारी किए गए थे. ऐसी शिकायतें मिलने पर पुलिस अधिकारियों ने तीर्थयात्रियों की चिंताओं को दूर करने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह कार्रवाई की. खाद्य विक्रेताओं के व्यापार या व्यवसाय पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया है (नॉन वेज बेचने पर प्रतिबंध को छोड़कर) और वे हमेशा की तरह अपना व्यवसाय संचालित करने के लिए स्वतंत्र हैं.

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सरकार ने दलील दी कि मालिकों के नाम और पहचान प्रदर्शित करने की आवश्यकता पारदर्शिता सुनिश्चित करने और कांवड़ियों के बीच किसी भी संभावित भ्रम से बचने का एक उपाय है. ये निर्देश धर्म, जाति या समुदाय के आधार पर कोई भेदभाव नहीं करते हैं.

'हर धर्म के दुकानदार पर समान रूप से लागू होता है नियम'

यूपी सरकार ने कहा, 'मालिकों के नाम और पहचान प्रदर्शित करने का नियम कांवड़ यात्रा के रूट पर सभी दुकानदारों और भोजनालयों पर समान रूप से लागू होता है, चाहे वे किसी भी धर्म या समुदाय से हों. निर्देशों का उद्देश्य बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और सांप्रदायिक तनाव की संभावना को देखते हुए कांवड़ यात्रा के दौरान सार्वजनिक सुरक्षा और व्यवस्था सुनिश्चित करना भी है. पिछली घटनाओं से पता चला है कि बेचे जाने वाले भोजन के प्रकार के बारे में गलतफहमियों के कारण तनाव और गड़बड़ी हुई. सरकार ने कहा कि ये निर्देश ऐसी स्थितियों से बचने का एक उपाय है.'

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