उत्तर प्रदेश के कानपुर में हुए विकास दुबे एनकाउंटर मामले पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. याचिकाकर्ता की ओर से एनकाउंटर की जांच के लिए बनाए गए कमीशन पर सवाल खड़े किए, जिसपर चीफ जस्टिस एस. ए. बोबडे ने याचिकाकर्ता को डांट लगाई. वकील घनश्याम उपाध्याय ने कमीशन में रिटायर्ड जस्टिस बीएस चौहान की नियुक्ति पर सवाल खड़े किए थे.
वकील की ओर से दावा किया गया कि रिटायर्ड जस्टिस बीएस चौहान के भाई यूपी में विधायक हैं और उनकी बेटी की शादी मध्य प्रदेश में हुई है. जिसपर चीफ जस्टिस की ओर से उन्हें कहा गया कि वो एक सम्माननीय जज रहे हैं, ऐसे में तब उनके रिश्तेदारों की ओर से कोई शिकायत नहीं हुई. तो अब आपको क्यों दिक्कत हैं.
सुनवाई के दौरान वकील ने अखबारों में छपे कई आर्टिकल का जिक्र किया, जिसपर चीफ जस्टिस की ओर से कहा गया कि हम अखबारों के आधार पर पूर्व जस्टिस की नियुक्ति पर फैसला नहीं करेंगे.
वकील को लताड़ लगाते हुए चीफ जस्टिस ने कहा कि क्या उनका कोई रिश्तेदार हादसे से संबंध रखता है? ऐसे में वो सही क्यों नहीं हो सकते हैं? आज कई ऐसे जज हैं जिनके भाई या पिता सांसद हैं, तो क्या सभी जज पक्षपाती हैं.
बता दें कि कानपुर में आठ पुलिसकर्मियों की मौत के दोषी गैंगस्टर विकास दुबे का एनकाउंटर हुआ था. जिसपर कई तरह के सवाल उठे थे, इसके बाद एनकाउंटर की जांच के लिए एक समिति बनाई गई थी. कमेटी में पूर्व जस्टिस बीएस चौहान के अलावा, यूपी के पूर्व डीजीपी के.एल. गुप्ता भी हैं.
गौरतलब है कि इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट की ओर से विकास दुबे एनकाउंटर मामले में सरकार पर सवाल उठाए गए थे, जबकि सरकार ने हलफनामे में एनकाउंटर को सही बताया था.