अगर ये सवाल पूछा जाए कि चिलचिलाती गर्मी में सबसे ज्यादा सूकून देने वाली चीज कौन सी है तो बहुत से लोगों का जवाब शायद एक ही होगा- आइसक्रीम.
लेकिन अगर कोई कह दे कि आपकी आइसक्रीम में सूअर की चर्बी मिली है तो उसके बाद क्या आप अपनी पसंदीदा चीज खा पाएंगे? शाकाहारी लोगों की बात तो छोड़िए, इसके बाद ज्यादातर लोग आइसक्रीम खाने से पहले सौ बार सोचेंगे.
इसी जुड़ा जब एक मैसेज वायरल होने लगा, जिसमें आइसक्रीम में सूअर की चर्बी होने की बात कही जा रही है तो हमने इसका वायरल टेस्ट करने का फैसला किया. आगे की बात जानने से पहले इस फोटो को ध्यान से देखिए.
इस मैसेज के मुताबिक दावा किया जा रहा है कि अमूल की पिस्ता मलाई वाली इस कुल्फी में सूअर की चर्बी मिली है. आइसक्रीम के पैकट पर गोला लगाकर E- 407 और E-412 नाम के दो पदार्थों में सूअर की चर्बी होने का दावा किया जा रहा है. अमूल के पैकेट पर छपी जानकारी के मुताबिक ये दोनों चीजें स्टेबलाईज़र्स के तौर पर इस्तेमाल की गयी हैं. अगर आप गूगल पर अमूल ही नहीं, किसी भी आईसक्रीम के पैकेट का फोटो निकाल कर देखें तो पता चलेगा कि स्टेबलाईज़र्स का इस्तेमाल लगभग हर आइसक्रीम में किया जाता है.
स्टेबलाईज़र्स क्या होते हैं और इनका इस्तेमाल क्यों किया जाता है ये जानने के लिए हमने गुजरात के आनंद में अमूल के फैक्ट्री के क्लालिटी कंट्रोल विभाग से संपर्क किया. वहां से पता चला कि स्टेबलाईज़र्स का मतलब होता है वो पदार्थ जो आइसक्रीम में आइस के क्रिस्टल बनने से रोकते हैं, उसे मुलायम बनाते हैं और ठंडक कम होने पर उसे तेजी से पिघलने से रोकते हैं. लेकिन असली चुनौती इस बात की सच्चाई का पता लगाना था कि क्या E-407 और E-412 नाम के पदार्थों में वाकई सूअर की चर्बी मिली है?
इसका पता लगाने के लिए हमने भारत सरकार के संस्थान FSSAI यानी भारतीय खाघ संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण में संपर्क किया. भारत में इस्तेमाल होने वाली खाने-पीने की सभी चीजों के गुणवत्ता की जांच का काम FSSAI ही करता है. FSSAI के एडवाइजर सुनील बख्शी ने हमें बताया कि खाने पीने की चीजों में E का मतलब होता है कि इन पदार्थों को यूरोपियन इकोनॉमिक कम्युनिटी (EEC) ने खाने पीने की चीजों में मिलाने की अनुमति दी हुई है.
ऐसे पदार्थों की पूरी एक लिस्ट है. हर नंबर से ये साफ होता है कि वो क्या पदार्थ है. बख्शी ने बताया कि E-407 कैराजीनन होता है जो समुद्र में उगने वाले लाल एलगी (शैवाल) से बनता है. इसका सबसे ज्यादा उत्पादन फिलीपींस में होता है.
इसी तरह E-412 का मतलब है ग्वार गम जो एक फली से निकला है और दाल जैसे ग्वार गम के बीज को पीस कर उसका पाउडर बनाया जाता है. इसका बहुत बड़ी मात्रा में उत्पादन भारत में भी होता और यहां से कई देशों को निर्यात भी किया जाता है. सुनील बख्शी ने कहा कि इसमें कोई शक नहीं कि ये दोनों चीजें पौधों से निकलती हैं इसलिए पूरी तरह शाकाहारी हैं. उन्होंने बताया कि पूरी दुनिया में आइसक्रीम बनाने में इसका खूब इस्तेमाल होता है.
हमने अमूल के एम डी आर एस सोढ़ी से भी पूछा कि क्या अमूल के आइसक्रीम में मांसहारी पदार्थ होने की बात में कोई सच्चाई है ? सोढ़ी ने बताया कि अमूल के हर खाने की चीज में सिर्फ और सिर्फ शाकाहारी पदार्थों का ही इस्तेमाल होता है. जिन पदार्थों के बारे में झूठी अफवाह फैलाई जा रही है वो भी प्लांट प्रोडक्ट हैं इसलिए पूरी तरह शाकाहारी हैं.
स्वीडन की एक वेबसाइट halalcertifiering.se न सिर्फ सभी खाने पीने की चीजों में मिलाए जाने वाले ऐडटिव्स के बारे में विस्तार से जानकारी देती है बल्कि इस बात को भी साफ करती है कि ये चीजें इस्लाम धर्म के हिसाब से खाने योग्य हैं या नहीं. इस वेबसाइट पर जाकर भी जब हमने चेक किया यही पाया कि E-407 और E-412 न सिर्फ शाकाहारी पदार्थों की लिस्ट में हैं बल्कि साफ लिखा है कि ये इस्लाम के हिसाब से भी हलाल हैं.
मतलब साफ है कि हमारे वायरल टेस्ट में अमूल आइसक्रीम में सूअर के चर्बी मिली होने की बात पूरी तरह गलत साबित हुई.
(अगर आपके पास भी कोई ऐसी फोटो, वीडियो या खबर है जो हैरान करने वाला लगे या जिसकी सच्चाई पर संदेह हो तो हमें इस ईमेल पर भेजें - viraltest@aajtak.com)