पश्चिम बंगाल के राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मिले. राज्यपाल ने मोदी और शाह को बंगाल की मौजूदा स्थिति से अवगत कराया. आधिकारिक तौर पर इसे ‘शिष्टाचार भेंट’ बताया गया.
नॉर्थ ब्लॉक में अमित शाह से भेंट करने के बाद त्रिपाठी ने कहा, “मैंने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को पश्चिम बंगाल की स्थिति से अवगत कराया है.”पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन लागू करने की संभावना से जुड़े सवाल पर त्रिपाठी ने कहा, मुलाकातों के दौरान ऐसी कोई चर्चा नहीं हुई.
राज्यपाल का दिल्ली दौरा गृह मंत्रालय की पश्चिम बंगाल सरकार को उस एडवाइजरी के बाद हुआ है जिसमें लोकसभा चुनाव खत्म होने के बाद भी राज्य में लगातार हिंसा जारी रहने पर ‘गहरी चिंता’ जताई गई. एडवाइजरी में साथ ही कहा गया कि इस तरह हिंसा का जारी रहना राज्य सरकार की नाकामी प्रतीत होता है.
राज्यपाल त्रिपाठी ने साफ किया कि उन्होंने प्रधानमंत्री या गृह मंत्री को कोई रिपोर्ट नहीं सौंपी, लेकिन मौखिक तौर पर उन्हें पश्चिम बंगाल की स्थिति के बारे में अवगत कराया.
राज्यपाल ने कहा, “मैंने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री से मुलाकातों के दौरान राष्ट्रपति शासन पर कुछ विचार नहीं किया, लेकिन भविष्य में इस तरह की संभावना को नकारा नहीं जा सकता. वहां राष्ट्रपति शासन की आवश्यकता हो सकती है लेकिन केंद्र को इस पर फैसला लेना है.”
बता दें कि राज्यपाल से दौरे के पहले पश्चिम बंगाल के लिए बीजेपी के प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय ने इंडिया टुडे से कहा था- “वहां (बंगाल में) संविधान का पालन नहीं हो रहा, इसलिए वहां राष्ट्रपति शासन लगाया जाना ज़रूरी है.”
उधर, टीएमसी नेता पार्था चटर्जी ने बीजेपी पर आरोप लगाया है कि वह केंद्रीय गृह मंत्रालय का राजनीतिक षड्यंत्र के लिए इस्तेमाल कर रही है. चटर्जी ने कहा, “बीजेपी गड़बड़ी कर रही है और हमारे कार्यकर्ताओं को मार रही है. दो दिन पहले गंगारामपुर में पुलिस अधिकारियों पर हमला किया गया. दिल्ली में बैठे बीजेपी नेता राज्य की स्थिति को नहीं समझ रहे.”
लेफ्ट ने बंगाल में राष्ट्रपति शासन के खिलाफ राय व्यक्त की है. सीपीएम नेता सीताराम येचुरी ने कहा, “हम पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन के खिलाफ हैं.”
इस बीच, पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव मलय कुमार डे ने कहा है कि जहां भी हिंसा के मामले सामने आए वहां बिना विलंब किए सख्त और उपर्युक्त कार्रवाई की गई. डे ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को चिट्ठी भेजकर कहा, “राज्य में चुनाव के बाद हिंसक घटनाएं हुईं जिनके लिए असामाजिक तत्व जिम्मेदार हैं. कानून प्रवर्तन अधिकारी सभी मामलों में सख्त और उपर्युक्त कार्रवाई कर रहे हैं. स्थिति नियंत्रण में है और इसे ऐसा नहीं माना जाना चाहिए कि ये कानून और व्यवस्था की मशीनरी की नाकामी है.”
रिपोर्ट्स के मुताबिक नॉर्थ 24 परगना में शनिवार को चुनाव के बाद की हिंसा में चार लोग मारे गए. बता दें कि पश्चिम बंगाल के चुनाव नतीजों में राज्य की कुल 42 सीटों में से टीएमसी को 22 और बीजेपी को 18 सीटों पर जीत मिली. पश्चिम बंगाल में 2021 में विधानसभा चुनाव होने हैं. ऐसे में बीजेपी और टीएमसी दोनों ही एक-दूसरे पर हिंसा भड़काने का आरोप लगा रहे हैं.