पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी ने इस महीने तीन दिन के लॉकडाउन का ऐलान किया है. ममता बनर्जी के ऐलान के बाद से सियासी बवाल मचा हुआ है. दरअसल, ममता बनर्जी ने गुरुवार, शनिवार और बुधवार यानी 23, 25 और 29 जुलाई को तो लॉकडाउन की घोषणा की है, लेकिन शुक्रवार को छोड़ दिया है.
इस्लाम में शुक्रवार का दिन बेहद अहम होता है. इस दिन मुस्लिम समुदाय के लोग नमाज पढ़ने के लिए एकजुट होते हैं. देश में यह पहली बार है, जब इस तरह लॉकडाउन किया गया है.
सूत्रों के मुताबिक शुक्रवार और रविवार को काफी संख्या में लोगों को बाहर जाने से रोकने और सप्ताह में चार कार्य दिवस सुनिश्चित करने के लिए योजनाबद्ध कदम उठाया गया है. इसके साथ ही गुरुवार और शनिवार को लॉकडाउन के दौरान राज्य के सभी सार्वजनिक स्थलों को पूरी तरह से सैनिटाइज किया जाएगा.
पश्चिम बंगाल के गृह सचिव अलपान बंदोपाध्याय ने लॉकडाउन की जानकारी देते हुए यह भी पुष्टि की कि सूबे में कोरोना वायरस का कम्युनिटी स्प्रेड शुरू हो गया है. उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में कम्युनिटी स्प्रेड हो गया है. इसको लेकर मेडिकल एक्सपर्ट भी चर्चा कर रहे हैं. इसको लेकर हमने राज्य के स्वास्थ्य विभाग से भी इनपुट लिया है.
विपक्ष ने सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस पर उठाए सवाल
वहीं, शुक्रवार को छोड़कर लॉकडाउन करने पर विपक्ष ने ममता बनर्जी सरकार पर सवाल उठाए हैं. बैरकपुर से बीजेपी सांसद अर्जुन सिंह ने सवाल उठाते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल में लॉकडाउन धर्म के आधार पर किया जाता है. ममता बनर्जी ने गुरुवार और शनिवार को पूरी तरह से लॉकडाउन किया है, लेकिन शुक्रवार को छूट दी है.
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उन्होंने कहा कि शुक्रवार को मुस्लिम समुदाय के लोग एकजुट होकर नमाज पढ़ते हैं, जिसकी वजह से ममता बनर्जी ने शुक्रवार को लॉकडाउन नहीं किया. उन्होंने कहा कि एक अगस्त को बकरीद है और इस दिन भी लॉकडाउन नहीं होगा. इसको लेकर कांग्रेस और लेफ्ट पार्टियों ने भी ममता बनर्जी सरकार पर सवाल उठाए हैं.
ममता के मंत्री ने सरकार के फैसले का किया बचाव
वहीं, पश्चिम बंगाल के डिजास्टर मैनेजमेंट एंड सिविल डिफेंस मंत्री जावेद अहमद खान ने अपनी सरकार के फैसले का बचाव किया है. उन्होंने बीजेपी पर पलटवार करते हुए कहा कि बीजेपी का दिमाग काम नहीं कर रहा है. बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष लगातार गाय, मूत्र और गोबर के बारे में सोच रहे हैं. अब उनका दिमाग गाय के गोबर से भर गया है. यही वजह है, जो बीजेपी इस तरह की बयानबाजी कर रही है. यह फैसला वोट बैंक की राजनीति के लिए नहीं लिया गया है, क्योंकि मस्जिद बंद हैं और सभी लोग अपने घर में नमाज पढ़ रहे हैं. इसका शुक्रवार से कोई लेना-देना नहीं है.
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