स्वेट इक्विटी सरल शब्दों में कंपनी की वो हिस्सेदारी है जो आपको बिना पैसे दिए गिफ्ट की जाती है और इस गिफ्ट के बदले में आप अपनी सेवाएं उस कंपनी को देते हैं. यानि एक तरह से आपको तनख्वाह के बदले कंपनी की हिस्सेदारी दी जाती है.
कंपनीज़ एक्ट 1956 के सेक्शन 79 A के मुताबिक कोई कंपनी अपना बिजनेस शुरू करने के एक साल बाद ही किसी को स्वेट इक्विटी जारी कर सकती है जबकि कोच्चि फ्रेंचाइजी इसी साल 17 मार्च को ही रजिस्टर्ड हुई है. यानि कोच्चि, अभी किसी को स्वेट इक्विटी जारी कर ही नहीं सकती.
इसके अलावा किसी भी कंपनी की पेड-अप कैपिटल का 15 प्रतिशत या 5 करोड़ रुपए, इनमें से जो भी ज़्यादा हो, उस कीमत से ज़्यादा की स्वेट इक्विटी किसी को जारी नहीं की जा सकती.
सुनंदा को कंपनी के 25 फीसदी फ्री होल्डिंग का 19 फीसदी हिस्सा मिला है यानी कुल शेयरों का 5 प्रतिशत. लेकिन इसकी कीमत पांच नहीं बल्कि करीब 79 करोड़ रुपए है. यानि कंपनी लॉ का दूसरा उल्लंघन.