26/11 को मुंबई पर हुए हमले के एकमात्र जिंदा पकड़े गए पाकिस्तानी आतंकवादी अजमल आमिर कसाब को बुधवार सुबह फांसी दे दी गई. कसाब को मुंबई की ऑर्थर रोड जेल से पुणे की यरवडा जेल में शिफ्ट कर बुधवार सुबह साढ़े सात बजे फंदे लटकाया गया. गृह मंत्री आर आर पाटिल ने इस बारे में आधिकारिक पुष्टि की. फांसी से पहले उसे मुंबई की आर्थर रोड जेल में लगभग चार साल से रखा गया था. यह कार्रवाई बहुत गोपनीय रखी गई. कसाब की फांसी पर विभिन्न बयान आ रहे हैं:
आर. आर. पाटिल: पूरी दुनिया के सामने अजमल कसाब का अपराध साबित हुआ और आखिरकार उसे फांसी दे दी गई. यह 26/11 के हमले में मारे गए निर्दोष लोगों और शहीद हुए अधिकारियों के लिए श्रद्धांजलि है.
सलमान खुर्शीद: पाकिस्तान में कसाब के परिवार को गृह मंत्रालय की तरफ से इस बारे में जानकारी दे दी गई थी. उनकी ओर से शव मांगा जाता तो उन्हें दे दिया जाता, लेकिन ऐसा नहीं हुआ.
जी पार्थसारथी, पाकिस्तान में पूर्व भारतीय उच्चायुक्त: कसाब के शव को भारत की धरती पर नहीं दफनाया जाना चाहिए था. कम से कम दुनिया को यह संदेश तो दिया जाता कि हम कितने गुस्से में हैं.
सुशील कुमार शिंदे: जैसे ही राष्ट्रपति महोदय की तरफ से कसाब की दया याचिका खारिज करने की सूचना मिली हमने तय समय के अनुसार ही फांसी की सजा देने की प्रक्रिया पर कार्रवाई की. कसाब के मृत शरीर को अगर पाकिस्तान मांगता तो हम दे देते लेकिन उन्होंने इसकी मांग नहीं की इसलिए उसे यहीं दफनाया जाएगा. पाकिस्तान को इसकी इत्तला कर दी गई है.
मुख्तार अब्बास नकवी: यह उन लोगों के लिए चेतावनी है जिन्होंने भारत में आतंक फैलाने की साजिश की है. इसके अलावा यह उन लोगों लिए अच्छी खबर है जो 26/11 के हमले से पीडि़त हैं.
राशिद अल्वी: हिन्दुस्तान में कानून का राज है. अगर कसाब को उसी दिन गोली मार दी जाती तो किसी को कोई परेशानी नहीं होती; पर कसाब को पूरा मौका दिया. आखिर में कसाब को उसके गुनाह की सजा मिली. यहां कानून का राज है, पर यहां कोई गुनाह करेगा तो उसे बख्शा नहीं जाएगा.
उज्ज्वल निकम: हां, कसाब को फांसी पर लटकाया जा चुका है. उसे बुधवार की सुबह साढ़े सात बजे यरवदा सेंट्रल जेल में फांसी दी गई है. मुझे लगता है कि कसाब की फांसी के जरिए दहशतगर्दों तक संदेश जाएगा कि हमारे देश में दहशतगर्दी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.