इस समय पूरा देश कोरोना वायरस जैसी महामारी से लड़ रहा है. यही वजह है कि लॉकडाउन को एक बार फिर तीन मई तक के लिए बढ़ा दिया गया है. देश के लगभग हर हिस्से में कोरोना पॉजिटिव मरीज पाए जा चुके हैं लेकिन केंद्रशासित प्रदेश लक्षद्वीप अभी भी इस महामारी के प्रकोप से अछूता है.
10 छोटे द्वीपों वाले लक्षद्वीप की आबादी लगभग 65,000 है लेकिन अभी तक वहां कोरोना वायरस के एक भी मामले की रिपोर्ट नहीं मिली है. जबकि वो भौगोलिक रूप से केरल के करीब है जहां कोरोना वायरस ने कहर मचा रखा है. लक्षद्वीप अपनी बुनियादी जरूरतों के लिए भी केरल पर ही निर्भर है.
लक्षद्वीप में ही रहने वाले 87 साल के मोहम्मद बदागे करीब 30 सालों तक वहां नाविक थे. मार्च में ही उन्हें और अलग-अलग द्वीपों के गांवों के निवासियों को महामारी के बारे में पता चला. ये लोग नाव के जरिए ही केरल के कोझीकोड और एर्नाकुलम जाते हैं क्योंकि द्वीपों पर महज प्राथमिक चिकित्सा की ही सुविधा है.
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हर द्वीप के सरकारी अस्पताल एक समय में 20 से अधिक रोगियों का इलाज नहीं कर सकते हैं और न ही वहां वेंटिलेटर की सुविधा है. किसी आपात स्थिति में हेलिकॉप्टर के जरिए मरीज को केरल के कोच्चि पहुंचाया जाता है. इतना ही नहीं द्वीप पर रहने वाले लोगों को किराने का सामान, सब्जियां, दवाएं लेने के लिए भी केरल जाना पड़ता है. द्वीपों पर सिर्फ मछली और नारियल ही प्रचूर मात्रा में पाया जाता है.
वहां के एक स्थानीय डॉक्टर मुनीर के मुताबिक महामारी को लेकर "ये द्वीप असुरक्षित है क्योंकि अधिकांश निवासी नाविक हैं और विदेश में काम करते हैं. हम सबसे ज्यादा जोखिम वाली जगह में रहते हैं. उन्होंने कहा, यहां के लोगों को पता ही नहीं था कि यह महामारी कितनी गंभीर है. "
डॉ मुनीर ने यह भी कहा कि लक्षद्वीप में महामारी के खिलाफ सावधानी बरतने की जरूरत है. उन्होंने कहा, "16 मार्च को, 3500 यात्री कोझीकोड और कोच्चि से द्वीपों पर आए. उनमें से 1,000 मिनिकॉय के मूल निवासी थे और बाकी लोग अन्य द्वीपों के रहने वाले थे. 20 मार्च के बाद ऐसे लोगों को क्वारनटीन में रहने का आदेश दिया गया था और कोई भी उनमें से कोरोना पॉजिटिव नहीं निकला.
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डॉक्टर के मुताबिक यदि किसी व्यक्ति में वायरस के लक्षण दिखते हैं तो जिला प्रशासन ने उनके लिए कुछ व्यवस्थाएं की हैं. ऐसे लोगों को इलाज के लिए केरल ले जाया जाएगा.
केंद्र शासित प्रदेश में 22 मार्च को आंशिक रूप से लॉकडाउन और 25 मार्च से पूर्ण लॉकडाउन जारी है. डॉ मुनीर के मुताबिक "हमारे पास बहुत कम पुलिसकर्मी और कुछ भारतीय रिजर्व बटालियन के अधिकारी हैं. उन्होंने कहा कि बीमारी के प्रसार की जांच करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं क्योंकि कई लोग लॉकडाउन नियमों का कड़ाई से पालन नहीं कर रहे हैं.