दिल्ली चुनाव में भाजपा के 70 में से 12 उम्मीदवार वे हैं, जिन्होंने एक महीने के भीतर ही यह पार्टी ज्वाइन की है. इसमें मुख्यमंत्री पद की दावेदार किरण बेदी भी शामिल हैं. भाजपा की यह उदारीकरण की नीति लोकसभा चुनाव से ही जारी है. क्योंकि ऐसे उम्मीदवार भाजपा की लहर को ऊंचाई देने में मदद ही कर रहे हैं. हां, वर्षों से भाजपा संगठन का हिस्सा रहे कार्यकर्ता ऐसे नेताओं के आने से जरूर नाराज हैं.
लोकसभा: भाजपा के 450 में से 60 से ज्यादा उम्मीदवार ऐसे थे, जो या तो दूसरी पार्टी छोड़कर आए या पहली कुछ दिन पहले ही पार्टी ज्वाइन की. हालांकि, इनमें से 80 फीसदी जीते भी. पांच को तो मंत्री भी बना दिया गया.
महाराष्ट्र: भाजपा के 261 उम्मीदवारों में से 50 का कभी पार्टी से नाता नहीं रहा. इनमें से ज्यादातर कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस के थे. 36 उम्मीदवार जीते भी.
हरियाणा: 90 सीटों वाली विधानसभा के लिए भाजपा के 20 फीसदी उम्मीदवार दूसरी पार्टी से आए थे. इनमें से भी 47 उम्मीदवारों की दूसरी लिस्ट में 15 उम्मीदवार ऐसे ही थे. ज्यादातर कांग्रेस और इंडियन नेशनल लोकदल के.
झारखंड: यहां भी भाजपा ने कांग्रेस और झारखंड विकास मोर्चा से आए 10 नेताओं को टिकट दिए.
जम्मू-कश्मीर: कश्मीर घाटी में पार्टी की रणनीति तो मजबूरी में उदार रही, क्योंकि यहां उनके पास उम्मीदवार ही नहीं थे. ऐसे में जो जहां से आया, उसे टिकट दिया.
भाजपा में शामिल होने वाले नेताओं की अचानक बढ़ती तादाद पर मुख्तार अब्बास नकवी कहते हैं कि यह मोदी लहर है, ऐसे में हम पार्टी के बाहर 'नो इंट्री' का बोर्ड नहीं लगा सकते. खैर, दिल्ली चुनाव के साथ-साथ दीगर पार्टी के नेताओं का भाजपा में शामिल होना जारी है. आम आदमी पार्टी के कई लोगों के अलावा कांग्रेस की कृष्णा तीरथ, पूर्व आईपीएस बृजलाल भाजपा ज्वाइन कर चुके हैं. खबर तो यह भी आई कि भाजपा सांसद वरुण गांधी दो दिन पहले मोदी की अकसर तारीफ करने वाले शशि थरूर के घर गए थे.