आप डीटीसी बस में सफर कर रहे हैं और देखते हैं कि एक व्यक्ति किसी महिला को छेड़ रहा है. महिला नाराजगी जाहिर करती है और फिर कुछ सेकेंड बाद ही महिला छेड़छाड़ करने वाले शख्स के गाल पर एक जोरदार तमाचा रसीद कर देती है. इसके बाद महिला के बचाव में कुछ और लोग तुरंत दोनों के करीब पहुंच जाते हैं.
बस में टेंशन अपने चरम पर पहुंची ही थी कि उस महिला और छेड़छाड़ करने वाले व्यक्ति ने ताली बजाकर गाना शुरू कर दिया. आप सोच में पड़ जाते हैं कि आखिर ये हो क्या रहा है. फिर अगले ही पल आपको रोहतक बस की घटना याद आती है. रोहतक में एक बस में ऐसा ही कुछ हुआ था, जब दो बहनों ने उनके साथ छेड़छाड़ करने वाले तीन युवकों की जमकर धुनाई की थी.
टेंशन खत्म तब होती है, जब आपको पता चलता है कि यह पहले से प्लान किया हुआ है. असल में दिल्ली में डीटीसी की बसों में यह एक मूविंग थिएटर चल रहा है. छेड़छाड़ के मुद्दे को इस तरह लोगों के सामने पेश करने वाले प्रमोद सिंह ने इंडिया टुडे को बताया कि बसों में यह सब करने का मकसद यात्रियों को यह समझाना है कि रोहतक जैसी घटनाओं को रोका जा सकता है.
बसों में किए जा रहे इस प्ले का मकसद 16 दिसंबर 2012 के दिल्ली गैंगरेप के उस भयानक हादसे की यादों को ताजा करना भी है. यह ग्रुप 16 दिसंबर को 'निर्भया' गैंगरेप के दो साल पूरे होने के मौके पर जंतर-मंतर पर एक नाटक का मंचन करेगा.
डायरेक्टर एन.के शर्मा के अपनी इस प्रस्तुति को ‘गुरिल्ला नुक्कड़ नाटक’ कहते हैं. इस थिएटर ग्रुप ने अपने कैंपेन का नाम ‘सुन रहा है ना तू?’ रखा है. प्रमोद ने बताया कि इस कैंपेन में काम करने वाले लड़के और लड़कियां वॉलेंटीयर कर रहे हैं और उन्हें किसी तरह की ट्रेनिंग भी नहीं दी गई है. उन्होंने बताया कि उनके यह नाटक इतने असली जैसे लगते हैं कि कई बार तो छेड़छाड़ करने वाले लड़के की भूमिका निभाने वाले युवक को यात्रियों ने थप्पड़ जड़ दिए हैं.
प्रमोद ने बताया कि एक बार तो डीटीसी ड्राइवर ने बस रोक दी और पुलिस को फोन करने लगा, बाद में उसे पता चला कि यह नाटक है.