गुरुवार को नागपुर सेंट्रल जेल में फांसी की सजा पाने वाले याकूब मेमन ने अंतिम वक्त तक माफी मिलने की उम्मीद नहीं छोड़ी थी. उसने फांसी से कुछ घंटे पहले भी राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को अपनी दया याचिका वाली चिट्ठी लिखी थी.
फांसी से कुछ घंटे पहले लिखी थी चिट्ठी
टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक, याकूब ने बुधवार को रात 11 बजे यह चिट्ठी लिखकर अपनी सेल के इंचार्ज को सौंप दी थी. वह गुरुवार सुबह तक चिट्ठी का
जवाब चाहता था, लेकिन उस चिट्ठी जेल से निकलकर राष्ट्रपति तक पहुंचती इससे पहले ही उसे गुरुवार की सुबह फांसी दे दी गई.
मां से मिलना चाहता था याकूब
फांसी के फंदे पर लटकाए जाने से ठीक पहले जब याकूब का सिर जब काले कपड़े से ढका दिया गया था, तब भी वह कुरान की आयतें बोल रहा था. जेल अधिकारियों से
उसने कहा था कि वह अंतिम इच्छा के तौर पर अपनी मां से मिलना चाहता था. लेकिन उसकी यह इच्छा पूरी नहीं हो पाई क्योंकि उसकी मां की तबीयत खराब थी और
वह मुंबई से नागपुर नहीं आ पाईं.
सन्न रह गए कैदी
बताया जाता है कि जब नागपुर जेल में बंद बाकी कैदियों को याकूब की फांसी की जानकारी मिली तो उनमें से ज्यादातर सन्न रह गए. याकूब को जब फांसी दी जा रही थी तो ज्यादा कैदी सो रहे थे और उन्हें उसकी फांसी का वक्त पहले से पता नहीं था.