तेलंगाना एसएससी पेपर लीक केस में गिरफ्तार बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष बंदी संजय कुमार को गुरुवार को वारंगल कोर्ट ने जमानत दे दी. पुलिस ने उन्हें 5 अप्रैल को अरेस्ट किया था. इसके बाद हनमकोंडा मजिस्ट्रेट ने संजय को 14 दिन की न्यायिक रिमांड में करीमनगर जेल भेज दिया था. इस आदेश के खिलाफ बीजेपी के लीगल टीम ने संजय की ओर से जमानत याचिका दाखिल की थी. उनकी याचिका पर गुरुवार को करीब 8 घंटे की लंबी सुनवाई के बाद न्यायाधीश ने दो लोगों की गारंटी और 20,000 रुपये के मुचलके पर जमानत दे दी. वह आज जेल से रिहा हो सकते हैं.
पुलिस ने पेपर लीक मामले में बंदी संजय कुमार को आरोपी नंबर वन (A1) बताया गया है. उनके अलावा एफआईआर में 9 और लोगों के नाम भी शामिल हैं. संजय को सीआरपीसी की धारा 151 के तहत गिरफ्तार किया गया थी. इसके तहत किसी व्यक्ति को तब गिरफ्तार किया जाता है, जब इस बात की आशंका हो कि वो व्यक्ति कोई अपराध कर सकता है और उसे रोका नहीं जा सकता. कुल मिलाकर, एहतियात के तौर पर व्यक्ति को गिरफ्तार किया जाता है.
बीजेपी ने गिरफ्तारी को बताया था अलोकतांत्रिक
बीजेपी का कहना है कि तेलंगाना सरकार पर बंदी संजय कुमार को बेबुनियाद आरोप लगाकर उसे गिरफ्तार कर लिया. बीजेपी सांसद और केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी ने संजय कुमार की गिरफ्तारी को 'अलोकतांत्रिक' करार दिया था. वहीं उनकी गिरफ्तारी के बाद तेलंगाना में बीजेपी कार्यकर्ता सड़क पर उतर आए थे और उनकी रिहाई की मांग करने लगे थे.
बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने ट्वीट किया था, 'आधी रात को चलाए गए ऑपरेशन में तेलंगाना पुलिस ने बंदी संजय कुमार को सेकंडरी स्कूल पेपर लीक में शामिल होने के झूठे आरोप में गिरफ्तार कर लिया. ये केसीआर के लिए सही नहीं होगा.'
यह है पेपर लीक का पूरा मामला
- विकराबाद और कमलापुर में 10वीं कक्षा के पेपर लीक का मामला सामने आया था. एफआईआर के मुताबिक, कमलापुर में कुछ अज्ञात लोगों ने एग्जाम सेंटर के बाहर अज्ञात छात्रों से पेपर लिया, उसकी फोटो ली और उसे वॉट्सऐप ग्रुप पर शेयर कर दिया था. विकराबाद में एक निरीक्षक ने एग्जाम शुरू होने के तुरंत बाद 10वीं क्लास के तेलुगू भाषा के पेपर की फोटो ली और उसे दूसरे निरीक्षक को भेज दिया.
- न्यूज एजेंसी के मुताबिक, सरकारी स्कूल में स्टैंडबाय निरीक्षक ने तेलुगु का पेपर शुरू होने के तुरंत बाद उसकी फोटो ली और उसे दूसरी सरकारी स्कूल के एक टीचर को भेज दिया. ऐसा इसलिए ताकि वो चीटिंग के लिए इसके जवाब तैयार कर सके. जैसे ही ये खबर फैली, वैसे ही दोनों ने इसे डिलीट कर दिया. अधिकारियों ने दावा किया है कि एग्जाम शांतिपूर्ण तरीके से हुए. मामला सामने आने के बाद बंदी संजय कुमार ने सरकार पर निशाना साधा और शिक्षा मंत्री पी. सविता इंद्रा रेड्डी के इस्तीफे की मांग की.
FIR में बांदी पर ये हैं आरोप
एफआईआर के मुताबिक, संजय कुमार पर आरोप है कि एसएससी (10वीं) पेपर लीक की घटनाएं सामने आने के बाद उन्होंने भोले-भाले छात्रों को राज्य सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करने के लिए उकसाया. उन्होंने बीजेपी कार्यकर्ताओं को भी प्रदर्शन करने के लिए भड़काया. इससे सार्वजनिक शांति बिगड़ने की आशंका है, जिससे कानून व्यवस्था की समस्या खड़ी हो सकती है.
एफआईआर दर्ज कराने वाले का कहना है कि संजय कुमार ने बीजेपी कार्यकर्ताओं को एग्जाम सेंटर के बाहर धरना देने के लिए भड़काया, ताकि आगे की परीक्षाएं होने में बाधा हो. इससे एसएससी का एग्जाम देने वाले छात्रों का मनोबल गिर सकता है. संजय कुमार के बर्ताव से राज्यभर में होने वाली परीक्षा प्रक्रिया प्रभावित होगी, जिससे छात्रों के भविष्य पर गंभीर असर पड़ेगा.