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'हमारे सांसद का हल्दी बोर्ड', केंद्र ने किया इंकार तो हल्दी किसानों ने तेलंगाना में लगाए अनूठे पीले बोर्ड

केंद्र वाणिज्य राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने बुधवार को संसद में कहा कि केंद्र सरकार की फिलहाल कोई नया मसाला बोर्ड बनाने की योजना नहीं है. इस बयान के बाद तेलंगाना के हल्दी किसानों में मायूसी छाई है जो लंबे समय से हल्दी बोर्ड की मांग कर रहे हैं. इसे लेकर आज किसानों ने निजामाबाद में पीले रंग के अनूठे बोर्ड लगाए हैं.

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निजामाबाद में किसानों द्वारा सांसद के विरोध में अनूठे पीले बोर्ड लगाए गए हैं
निजामाबाद में किसानों द्वारा सांसद के विरोध में अनूठे पीले बोर्ड लगाए गए हैं

तेलंगाना के हल्दी किसानों ने भाजपा नेतृत्व के खिलाफ अनोखा विरोध शुरू कर दिया है. हल्दी किसानों ने निजामाबाद से भाजपा के सांसद अरविंद धर्मपुरी का मजाक उड़ाने वाले होर्डिंग पूरे शहर में लगाए हैं. किसानों का कहना है कि सांसद अरविंद, केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह और बीजेपी नेता राम माधव ने 2019 के लोकसभा चुनावों के दौरान निजामाबाद के हल्दी किसानों से हल्दी बोर्ड स्थापित करने का वादा किया था, जिससे अब सरकार इंकार कर रही है.

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बॉन्ड में किया था चुनावी वादा

दरअसल, बुधवार को केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने संसद में बताया कि देश में हल्दी बोर्ड या कोई अन्य मसाला-विशिष्ट बोर्ड स्थापित करने का कोई प्रस्ताव नहीं है. इस बयान के बाद से ही किसान भड़के हुए हैं. सांसद अरविन्द धर्मपुरी ने 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान एक ज्यूडिशियल बॉन्ड पर लिखित में वादा किया था कि चुनाव जीतने के 5 दिनों के भीतर निजामाबाद को एक हल्दी बोर्ड मिल जाएगा और अगर वह वादा निभाने में विफल रहते हैं तो वह इस्तीफा दे देंगे और किसानों के अभियान में शामिल हो जाएंगे.

अब जब किसानों से किया वादा पूरा नहीं हुआ तो किसान विरोध पर उतर आए हैं. आज सुबह निजामाबाद में भाजपा और सांसद अरविंद का उपहास उड़ाने वाले पोस्टर देखे गए. पीले रंग के होर्डिंग पर तेलुगु में लिखा है, 'हल्दी बोर्ड- हमारे माननीय निजामाबाद सांसद द्वारा लाया गया हल्दी बोर्ड'

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सरकार ने किया इंकार
यह मुद्दा तब सामने आया जब बीआरएस सांसद वेंकटेश नेथा बोरलाकुंटा, कविता मालोथु, दयाकर पसुनूरी और गद्दाम रंजीथ रेड्डी द्वारा निजामाबाद में हल्दी बोर्ड की स्थापना से संबंधित सवाल उठाया. इस सवाल का जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री वाणिज्य और उद्योग राज्य अनुप्रिया पटेल ने कहा: 'मसाला बोर्ड अधिनियम, 1986 के तहत स्थापित एक वैधानिक स्वायत्त निकाय, मसाला बोर्ड को हल्दी, धनिया और मिर्च सहित 52 मसालों को बढ़ावा देने की जिम्मेदारी सौंपी गई है. इसलिए, देश में हल्दी बोर्ड या कोई अन्य मसाला-विशिष्ट बोर्ड स्थापित करने का कोई प्रस्ताव नहीं है.'

कविता का सांसद पर हमला

बीआरएस एमएलसी के. कविता कई मौकों पर हल्दी बोर्ड के मुद्दे पर भाजपा सांसद अरविंद धर्मपुरी को घेर चुकी हैं. कविता ने आरोप लगाया कि सांसद अरविंद केंद्र सरकार से अपना एक चुनावी वादा तक पूरा नहीं करवा सके. एक आरटीआई का हवाला देते हुए कविता ने भाजपा सांसद से निजामाबाद के हल्दी किसानों को उनके मूल बकाया से वंचित करने का कारण पूछा था. उन्होंने आरोप लगाया कि सांसद 100 करोड़ रुपये के आवंटन के बारे में बढ़ा-चढ़ा कर दावा कर रहे हैं, जबकि उनके शासन में हर किसान को हल्दी बोर्ड से केवल 200 रुपये मिलते थे. उन्होंने कहा कि सांसद ने झूठ बोलकर चुनाव जीतने के लिए लोगों से वोट लिए.

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किसानों का अनूठा प्रदर्शन
अब, जब केंद्र द्वारा साफ कर दिया गया है कि तेलंगाना को हल्दी बोर्ड नहीं दिया जाएगा, किसान एकजुट हो गए हैं. निजामाबाद के हल्दी किसानों ने अपनी नाराजगी व्यक्त करने और सांसद अरविंद धर्मपुरी को उनके वादे की याद दिलाने का फैसला किया है. हल्दी बोर्ड की सारी उम्मीदों पर पानी फेरने के बाद निजामाबाद के किसानों ने अब निजामाबाद के BJP सांसद का मजाक उड़ाने वाले पोस्टर लगा दिए हैं.  

कितना अहम है हल्दी किसानों का मुद्दा
निजामाबाद में हल्दी किसानों का मुद्दा कितना अहम है, इसका अंदाजा आप 2019 के लोकसभा चुनाव से लगा सकते हैं. 2019 के लोकसभा चुनाव में निजामाबाद सीट पर मुख्यमंत्री केसीआर की बेटी के. कविता ने चुनाव लड़ा तो उनके खिलाफ तमाम हल्दी किसान एकजुट हो गए. इसकी वजह थी कि कविता ने अलग हल्दी बोर्ड बनाने की किसानों की मांग खारिज कर दी थी. किसानों ने इसके जवाब में 178 निर्दलीय उम्मीदवार उतार दिए. यहां भाजपा के लिए मामला आसान हो गया और बीजेपी सांसद अरविंद धर्मपुरी जीत गए.उन्होंने हल्दी बोर्ड का चुनावी वादा भी किया था. अब जब केंद्र ने हल्दी बोर्ड की मांग खारिज कर दिया है, तो किसान फिर एकजुट हो गए हैं.

 

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