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उत्तर प्रदेश

बदलता समाज: पिता की तेरहवीं पर बड़ी बहन बनी पर‍िवार की मुख‍िया, भाईयों ने पहनाई पगड़ी

भाईयों ने बहन को पहनाई पगड़ी
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बदलते समय के साथ साथ बेटे और बेटियों में फर्क खत्म करने की पहल मेरठ के एक परिवार ने की है. यहां पर परिवार के मुखिया का निधन हो जाने के बाद घर में सबसे बड़ी विवाहित बेटी को पगड़ी बांधकर घर का मुखिया बनाया गया है. यह काम परिजनों के साथ मिलकर तीन भाइयों ने किया है और अपनी बहन को पगड़ी बांधकर परिवार का मुखिया बनाया है. तीनों भाइयों ने पिता की तेरहवीं पर अपनी बहन के सिर पर पगड़ी बांधी और उसको परिवार का मुखिया बनाया. इस परिवार का मानना है कि बेटी और बेटे में कोई फर्क नहीं, विवाहिता होने पर बेटी का कुल और गोत्र अलग हो जाते हैं लेकिन इस परिवार ने समस्त मान्यताओं को पीछे छोड़ते हुए विवाहित बेटी को ही घर का मुखिया बनाया है. घर के बड़ों में मौजूद चाचा विजेंदर पाल सिंह, जितेंद्र सिंह, फूफा निरंजन शास्त्री, ऋषिपाल मलिक, पूर्व राज्य मंत्री ओमबीर तोमर, रामपाल मांडी, जयविन्दर रावत, रणधीर शास्त्री व एस०के० शर्मा, अंकुश चौधरी ने पगड़ी बांधी. जानें- पूरी स्टोरी. 

(Photo:aajtak.in)

पिता का अंतिम संस्कार करती बेटी
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बदलते वक्त में यूपी के मेरठ की यह कहानी परंपराओं की नई इबारत लिख रही है. जब एक परिवार में पिता की मौत के बाद अंतिम संस्कार में घर की बड़ी बहन ने पिता का अंतिम संस्कार किया. फिर उनके भाईयों और परिवार के बुजुर्गों ने रस्म पगड़ी में इस शादीशुदा बेटी को ही परिवार का मुख‍िया घोष‍ित किया. दरअसल उर्वशी चौधरी (39) मेरठ की एडवोकेट और एक समाजसेवी हैं जिनके तीन छोटे भाई विकास, वरुण और विवेक हैं और उनकी एक छोटी बहन ऐश्वर्या है. 

(Photo:aajtak.in)

पिता का अंतिम संस्कार करती बेटी
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बीती 7 सितंबर को उनके पिता हरेंद्र सिंह (74 वर्ष) का एक बीमारी के चलते निधन हो गया. हरेंद्र सिंह एक किसान थे साथ ही एक प्राइवेट टीचर भी थे. घर में सबसे बड़ी बेटी होने के नाते उर्वशी चौधरी का अपने पिता से ज्यादा लगाव था. उनके पिता भी हर बात में उनका ही राय मशवरा लिया करते थे. उर्वशी चौधरी की 19 साल पहले शादी हो चुकी है. उर्वशी उस समय 12वीं क्लास में थी जब उनकी शादी मेरठ के ही प्रॉपर्टी का काम करने वाले अजय चौधरी से हुई थी. 

(Photo:aajtak.in)

 

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पिता का अंतिम संस्कार करती बेटी
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शादी के बाद उनके पति अजय चौधरी ने ही उनको आगे की पढ़ाई में साथ दिया और उर्वशी M.A. B.Ed एलएलएम कर वकील की प्रैक्टिस करने लगी. उर्वशी चौधरी के पिता हरेंद्र सिंह के निधन के बाद उर्वशी के तीनो भाई बहन और मां राधा (62) ने मिलकर उर्वशी चौधरी को घर का मुखिया बनाया और उनको पगड़ी पहनाई. उर्वशी चौधरी के पिता भी चाहते थे कि उनके बाद घर के मुखिया की जिम्मेदारी बेटी उर्वशी चौधरी ही संभाले क्योंकि पिता और बेटी में बहुत लगाव था और घर के सारे फैसले ही दोनों साथ मिलकर लिया करते थे. 

(Photo:aajtak.in)

पिता का अंतिम संस्कार
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बता दें कि इस इलाके में पगड़ी पहनने का मतलब घर का मुखिया बन जाना है और पूरे परिवार और खानदान को साथ लेकर चलने की जिम्मेदारी परिवार के मुखिया की हो जाती है. यह सम्मान का प्रतीक है और उत्तरदायित्व का भी. जब किसी परिवार के मुखिया की मृत्यु हो जाती है तो किसी पुरुष सदस्य के सिर पगड़ी बांधी जाती है लेकिन एक विवाहिता बेटी को घर का मुखिया बनाने और उसको पगड़ी पहनाने का अपने आप में यह एक अलग उदाहरण है. 

(Photo:aajtak.in)

पिता का अंतिम संस्कार करती बेटी
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उर्वशी चौधरी कहती हैं कि पिता की इच्छा और भाइयों के सहयोग से उनको परिवार का मुखिया बनाया गया है लेकिन परिवार का मुखिया बनने के बाद उनके ऊपर भी बहुत बड़ी जिम्मेदारी आ गई है. अब उनके कंधों पर दो परिवारों को संभालने की जिम्मेदारी है क्योंकि वह अपने ससुराल की बड़ी बहू हैं और वहां की भी जिम्मेदारी उन्हीं के कंधों पर है. विवाहिता बेटी को घर का मुखिया बनाने और रसम पगड़ी करने का यह अपने आप में एक उदाहरण है.

(aajtak.in)

पिता का अंतिम संस्कार करती बेटी
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वहीं, उर्वशी चौधरी बताती हैं कि परिवार में वह सबसे बड़ी हैं और बचपन से ही परिवार ने बेटा और बेटी में कोई फर्क नहीं किया. पिताजी ने हमेशा बेटियों की पढ़ाई लिखाई पर जोर दिया. शादी के बाद पति ने भी उनका साथ दिया और आज परिवार के फैसले में भी पति और ससुराल वालों ने उनका पूरा साथ दिया है. वो अपनी जिम्मेदारी पर पूरा उतरने की भरपूर कोशिश करेंगी. 

(aajtak.in)

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