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उत्तर प्रदेश

एटा: गांव में डेंगू का कहर, एक हफ्ते में 13 लोगों की मौत, गांव से भाग रहे लोग

गांव में डेंगू का कहर, एक हफ्ते में 13 लोगों की मौत.
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एक तरफ जहां पूरा देश कोरोना जैसी महामारी से पीड़ित है तो वहीं यूपी के जनपद एटा में डेंगू के डंक ने मौत का ऐसा तांडव मचाया है कि कसेटी गांव में मौत का मातमी सन्नाटा पसरा हुआ है. डेंगू की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले 7 दिनों में करीब 13 लोगों की जान चली गई जबकि सैकड़ों लोग डेंगू की बीमारी से ग्रसित हैं और आगरा, अलीगढ़, इटावा जैसे महानगरों के बड़े हॉस्पिटल में अपना इलाज करा रहे हैं. डेंगू केे खौफ से लोग घर में ताला डालकर भाग चुके हैं. (एटा से देवेश पाल स‍िंंह की र‍ि‍पोर्ट)     

गांव में डेंगू का कहर, एक हफ्ते में 13 लोगों की मौत.
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पूरे गांव में डेंगू की इतनी दहशत बढ़ गई है कि गांव से करीब एक दर्जन परिवार गांव से पलायन कर गया है. कसैटी गांव की गलियों में मातमी सन्नाटा छाया हुआ है. इस गांव के हर घर से कोई न कोई डेंगू से पीड़ित है. कोई अपने प्रियजन की मौत से मातम मना रहा है तो कोई डेंगू की बीमारी से ठीक होने के लिए ईश्वर से प्रार्थना कर रहा है.

गांव में डेंगू का कहर, एक हफ्ते में 13 लोगों की मौत.
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ग्रामीणों में इस बात के लिए भी आक्रोश है कि स्वास्थ्य विभाग सिर्फ औपचारिकता भर कर रहा है. इस भयावहता में भी स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गांव में कोई कैंप नहीं लगाया, सिर्फ दवा के नाम पर कुछ गोलियां बांटकर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर ली है.

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गांव में डेंगू का कहर, एक हफ्ते में 13 लोगों की मौत.
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जिला प्रशासन की इस बेरुखी से आहत ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मदद की गुहार लगाई है. ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से गुहार लगाते हुए कहा है कि सरकार, अब तो हमारी जान बचा लो. 

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हालांकि स्वास्थ्य विभाग के मलेरिया अधिकारी का कहना है कि डेंगू की बीमारी के फैलने के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम लगातार इस गांव का दौरा कर रही है और हमने गांव के लोगों के टेस्ट भी किए हैं और दवाएं भी स्वास्थ्य विभाग बांट रहा है. डेंगू से घबराकर गांव के लोग प्राइवेट हॉस्पिटल में अपना रुख कर रहे हैं लेकिन स्वास्थ्य विभाग की टीम अपना काम कर रही है. 

गांव में डेंगू का कहर, एक हफ्ते में 13 लोगों की मौत.
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स्वास्थ्य विभाग के इस दावे पर नजर डाली जाए तो मामला उलटा ही नजर आता है. यहां हर दूसरे घर में मौत का मातम छाया हुआ है, किसी के घर से बुजुर्ग
की मौत हुई है तो किसी के घर में जवान बेटे और बेटी की मौत हुई है. गांव के एक-दो घर में तो हालात इतने भयावह है कि घर के तीन-तीन सदस्यों की डेंगू से
मौत हो चुकी है. 

गांव में डेंगू का कहर, एक हफ्ते में 13 लोगों की मौत.
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इस बारे में अपने पिता की मौत का गम झेल चुके प्रवेश राजपूत ने बताया कि हमारे गांव में डेंगू-मलेरि‍या और पीलिया जैसी बहुत सारी बीमारियां चल रही हैं, कोई मदद नहीं कर रहा है. इसमें कई लोगों की जान जा चुकी है और सैकड़ों की तादाद में लोग हॉस्‍प‍िटल में भर्ती हैं और गांव में से कई परिवार गांव छोड़कर बाहर जा चुके हैं. मेरे पिता की भी 14-15 दिन इलाज के बात मौत हो गई. 

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गांव के प्रधान शेरसिंह ने बताया कि इस गांव के अंदर छह-सात सौ लोग प्रभावित चल रहे हैं और अभी तक 13 लोगों की मौत हो चुकी है. इस गांव में डेंगू के लक्षण ज्यादा पाए जा रहे हैं. मलेरिया विभाग की टीम आती है, जांच करती है लेकिन किसी की भी रिपोर्ट बताती नहीं है और वह लोग शाम तक कुछ ड्रॉप लगाकर और गोली बांटकर चले जाते हैं. इससे गांव के लोग काफी परेशान हैं और 6-7 परिवार यहां से जा भी चुके हैं.

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इस बारे में मलेरिया अधिकारी शशांक सिंह ने सफाई देते हुए कहा कि मदद के लिए रोजाना आठ-दस टीमें जा रही हैं. वहां ओपीडी भी हो रही है, दवा भी दी जा रही है. डेंगू और मलेरिया की जांच भी हो रही  है. जो भी पेशेंट वहां से पॉजि‍टिव निकल रहा है, उसे जिला हॉस्‍पिटल में रेफर किया जा रहा है. डेंगू की रोकथाम के लिए पहले से तो कोई प्रयास नहीं किया जा सकता है. पानी रुका हुआ है या कूलर में पानी है तो उसमें लार्वा पाया जाता है. अब इन चीजों का समाधान स्वास्थ्य विभाग तो नहीं करेगा. इन चीजों के लिए हमें, आपको या पब्लिक को भी थोड़ा सा जागरूक होना पड़ेगा.

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