समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान के बाद अब मुजफ्फर नगर की खतौली विधानसभा सीट से BJP विधायक विक्रम सैनी की विधानसभा सदस्यता रद्द कर दी गई है. यह दावा राष्ट्रीय लोकदल (RLD) के प्रमुख जयंत चौधरी ने किया है. उन्होंने ट्वीट कर कहा, 'आखिरकार कोर्ट के आदेश का संज्ञान लेकर भाजपा के विधायक विक्रम सैनी की सदस्यता रद्द की गई है. उत्तर प्रदेश विधान सभा अध्यक्ष को मेरे पत्र के बाद कुछ लोग कह रहे थे की मुझे जन प्रतिनिधित्व कानून की पूरी जानकारी नहीं है! सदन की गरिमा के लिए ये कदम अनिवार्य था.'
इस मुद्दे पर विक्रम सैनी का बयान भी सामने आया है. उन्होंने कहा कि उन्हें सोशल मीडिया के जरिए ये जानकारी मिली है. अगर यह सही है तो वह कानून का सम्मान करते हैं और क्योंकि कानून सबके लिए एक समान है, इसलिए वह फैसले को सिर झुकाकर स्वीकार करते हैं. उन्होंने आगे कहा, ' कानून से बड़ा कोई नहीं है. ना मैं हूं और ना कोई और... सतीश महानाजी (विधानसभा अध्यक्ष) भी कानून के मुताबिक ही काम करेंगे. सदस्यता रद्द वे भी नहीं कर सकते. कानून के अंतर्गत अगर 2 साल की सजा पाए व्यक्ति की या अधिक सजा पाए जनप्रतिनिधि की सदस्यता जा सकती है तो सतीश महानाजी भी उसे रोक नहीं सकते. वे कानून का पालन करने वाले विधानसभा अध्यक्ष हैं. कानून की उन्हें जानकारी है तो वह वही करेंगे जो कानून के अंतर्गत होगा. सैनी ने यह भी कहा कि जयंत चौधरी को विधानसभा अध्यक्ष को पत्र नहीं लिखना चाहिए था.'
विक्रम सैनी ने आगे कहा, 'कवाल में दंगा हुआ था. गौरव और सचिन की हत्या कर दी गई थी. बहन-बेटियों के सम्मान में लड़ाई लड़ी गई. पुलिस ने फर्जी मुकदमा दर्ज किया था. माननीय न्यायालय ने 2 साल की सजा सुनाई. सजा का गम नहीं है. लड़ाई लड़ी है और लड़ते रहेंगे. पार्टी का कार्यकर्ता होने के नाते काम करता रहूंगा. मेरी विधानसभा सदस्यता जा सकती है, लेकिन मेरी पार्टी की सदस्यता तो रहेगी. मैं पार्टी के लिए चार गुना शक्ति से कार्य करता रहूंगा. देश हित में काम करता रहूंगा. हिंदू हित में कार्य करता रहूंगा.'
बता दें की दंगे से पहले 27 अगस्त 2013 को मुजफ्फरनगर जनपद के कवाल गांव में गौरव और सचिन की हत्या के बाद पुलिस ने खतौली विधान सभा सीट से बीजेपी विधायक विक्रम सैनी सहित 28 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया था. विधायक विक्रम सैनी सहित इन सभी 28 में से 12 लोगों को 11 अक्टूबर के दिन मुजफ्फरनगर स्थित एमपी एमएलए कोर्ट ने 2-2 साल की सजा सुनाते हुए 10-10 हजार रुपए का आर्थिक दंड भी लगाया था. मामले में सबूत के अभाव में 15 लोगों को बरी कर दिया गया था वहीं एक शख्स की मौत हो गई थी.