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उत्तर प्रदेश: अखिलेश की रमाकांत से मुलाकात, BJP के बाद बसपा ने भी उठाए सवाल

अखिलेश यादव के उनकी पार्टी के विधायक रमाकांत यादव से मुलाकात करने पर भारतीय जनता पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने उन पर निशाना साधा है. मायावती ने कहा,'बाहुबली विधायक रमाकांत यादव से अखिलेश की सहानुभूति पर तीखी प्रतिक्रिया होना स्वभाविक है. यह आम धारणा को प्रबल करता है कि समाजवादी पार्टी अपराधिक तत्वों को संरक्षित करती है.

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अखिलेश यादव (File Photo)
अखिलेश यादव (File Photo)

समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने हाल ही में जेल में बंद पार्टी विधायक रमाकांत यादव से मुलाकात की थी. उनकी इस मुलाकात पर अब भाजपा के साथ-साथ बसपा ने भी निशाना साधना शुरू कर दिया है. भाजपा ने अखिलेश पर जातिगत मानसिकता हावी होने का आरोप लगाया है तो वहीं मायावती ने सवाल पूछा है कि अखिलेश पार्टी के जेल में बंद मुसलमान नेताओं से जेल में मिलने क्यों नहीं गए.

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अखिलेश के आजमगढ़ जेल में रमाकांत से मिलने पर मायावती ने कहा,'बाहुबली विधायक रमाकांत यादव से अखिलेश की सहानुभूति पर तीखी प्रतिक्रिया होना स्वभाविक है. यह आम धारणा को प्रबल करता है कि समाजवादी पार्टी अपराधिक तत्वों को संरक्षित करती है. मायावती ने आगे कहा कि आखिर अखिलेश जेल में बंद मुस्लिम नेताओं से मिलने जेल क्यों नहीं जाते?

दोनों की मुलाकात पर भाजपा प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने कहा था कि अखिलेश यादव अपनी पार्टी में भी जातिगत की मानसिकता से ग्रसित हैं. रमाकांत यादव से मिलने जाते हैं, लेकिन अपनी पार्टी के दूसरी जाति के नेताओं को नहीं मिलते. इसीलिए उनकी पार्टी में भी जाति प्रेम को लेकर सवाल उठ रहे हैं.

चुनावी हिंसा के मामले में किया था सरेंडर

बता दें कि सपा विधायक रमाकांत यादव ने MP-MLA कोर्ट के सामने 24 साल पुराने चुनावी हिंसा के मामले में सरेंडर किया था. रमाकांत फूलपुर पवई सीट से विधायक हैं. 24 साल पहले 17 फरवरी 1998 में लोकसभा चुनाव के दौरान रमाकांत यादव का बसपा प्रत्याशी अहमद डंपी के साथ झगड़ा हो गया था.

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झगड़ा इतना ज्यादा बढ़ गया कि दोनों तरफ से समर्थकों ने गोली चला दी और माहौल तनावपूर्ण हो गया. पुलिस ने तब दोनों रमाकांत यादव और अहमद डंपी के खिलाफ केस दर्ज किया था. उनके समर्थकों के खिलाफ भी एक्शन हुआ था. वहीं अक्टूबर 1998 में जब मामले की जांच पूरी कर ली गई, तब दर्ज चार्जशीट में रमाकांत और अकबर अहमद डंपी के अलावा 79 अन्य लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया था.

अब इतने पुराने मामले में पिछले साल हाई कोर्ट ने रमाकांत यादव और दूसरे आरोपियों को सरेंडर करने लिए कहा था. लेकिन विधानसभा चुनाव की वजह से रमाकांत यादव ने तब सरेंडर नहीं किया और MP-MLA कोर्ट को उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी करना पड़ा. वैसे इससे पहले 6 साल पुराने एक और मामले में रमाकांत यादव द्वारा सरेंडर किया गया था. उन पर सड़क ब्लॉक करने का आरोप था. उस मामले में भी पुलिस ने उन पर केस दर्ज किया था.

(इनपुट: रमाकांत)

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