scorecardresearch
 

UP: MLC टिकट के लिए गठबंधन धर्म निभाएंगे अखिलेश या करीबियों को करेंगे खुश?, जानिए क्या है चुनौती

यूपी में विधान परिषद में बीजेपी के 66 जबकि सपा के 11 सदस्य हैं. 6 जुलाई को विधान परिषद के 13 सदस्यों का कार्यकाल खत्म हो जाएगा, जिनके लिए 20 जून को चुनाव होगा. जिन 13 सीटों पर चुनाव होना है, उसमें 9 पर बीजेपी और 4 पर सपा जीत दर्ज कर सकती है. एक सीट जीतने के लिए 31 सदस्यों की जरूरत होगी.

Advertisement
X
13 सीटों में 4 पर सपा जीत दर्ज कर सकती है (फाइल फोटो)
13 सीटों में 4 पर सपा जीत दर्ज कर सकती है (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • 9 जून है नामांकन करने की आखिरी तारीख
  • 13 जून तक नाम वापस ले सकते हैं दावेदार
  • 20 जून को वोटिंग के बाद होगी मतगणना

यूपी में विधान परिषद की 13 सीटों पर चुनाव ने समाजवादी पार्टी के लिए एक चुनौती खड़ी कर दी है. आंकड़ों और संख्या बल के आधार पर बीजेपी के 13 में से 9 सदस्य चुने जा सकते हैं, वहीं सपा के 4 सदस्य विधान परिषद जा सकते हैं लेकिन अखिलेश यादव के सामने यह चुनौती है कि उनकी पार्टी में दावेदार ज्यादा हैं. सहयोगी दल भी उच्च सदन में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए उन पर दबाव बना रहे हैं. यानी अखिलेश के पास सीटें कम और दावेदार ज्यादा हैं.

Advertisement

8 जून को स्वामी प्रसाद करेंगे नामांकन

विधानसभा चुनाव से ऐन पहले बीजेपी छोड़कर सपा का दामन थामने वाले स्वामी प्रसाद मौर्य को अखिलेश यादव ने विधानपरिषद भेजने का फैसला पहले ही कर लिया था. मंगलवार को स्वामी प्रसाद मौर्य के नामांकन को लेकर चर्चा थी हालांकि उन्होंने ट्वीट कर बताया कि वह 8 जून को नामांकन करेंगे और उस मौके पर अखिलेश यादव भी मौजूद रहेंगे.

केशव मौर्य से लेकर दानिश अंसारी तक... यूपी में इन 7 मंत्रियों का MLC बनना तय, ये है 15 सीटों का गेम प्लान

बेटे के लिए ओपी राजभर का है दबाव

चर्चा यह भी है कि सपा ओम प्रकाश राजभर के बेटे अरविंद राजभर को विधान परिषद भेजेगी. इसके साथ ही यह चर्चा भी हो रही है कि ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव पर दबाव बनाया है जबकि अखिलेश अपने किसी कार्यकर्ता को विधान परिषद भेजना चाहते हैं. इधर इस बात की भी चर्चा है कि इमरान मसूद भी विधान परिषद के लिए बात कर चुके हैं. अब अखिलेश यादव को इसका फैसला लेना है.

Advertisement

इन मुद्दों पर फंसे हैं सपा अध्यक्ष

ऐसे हालात में अखिलेश यादव के सामने दोहरी चुनौती है. एक तो अपने विश्वस्त कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ाना और गठबंधन में शामिल दलों को संतुष्ट करना. इधर आगे की सियासी जमीन को देखते हुए जातीय समीकरण बनाना भी जरूरी है. दरअसल अखिलेश हाल ही में हुए राज्यसभा सीटों पर नाम तय करने में भी अपनी पार्टी से सिर्फ एक जावेद अली खान को उच्च सदन में भेज पाए हैं.

अखिलेश यादव की पत्नी डिम्पल यादव के नाम की चर्चा अंतिम समय तक होती रही थी, जबकि बाद में आरएलडी अध्यक्ष जयंत चौधरी ने नामांकन किया.अखिलेश को रणनीतिक रूप से इसमें अपने गठबंधन के साथी को साथ रखने के लिए समझौता करना पड़ा.

निर्दलीय कपिल सिब्बल को सपा का समर्थन

वहीं निर्दलीय चुनाव मैदान में उतरे कपिल सिब्बल को सपा समर्थन दे रही है. नाराज आजम खान को देखते हुए सिब्बल का साथ देने का फैसला भी अहम है, क्योंकि सिब्बल ने आजम की जमानत में अहम भूमिका निभाई थी.

नतीजा यह रहा कि सपा के खाते की तीन सीटों में से एक पर आरएलडी और एक पर निर्दलीय राज्यसभा पहुंचे जबकि सपा की अब सिर्फ एक सीट रह गई. कहा जा रहा है कि इसके बाद से ही ओम प्रकाश राजभर ने सपा की 4 विधानपरिषद सीटों में एक सीट पर दावा ठोंक दिया. जानकारी के अनुसार एक सीट पर अरविंद राजभर का विधानपरिषद जाना लगभग तय है.

Advertisement

इस बार गठबंधन धर्म निभा रहे अखिलेश

अखिलेश यादव बीएसपी से लेकर कांग्रेस तक के साथ गठबंधन कर चुकी है. हालांकि बाद में सपा और इन दलों के रास्ते अलग हो गए. इसके बाद यह बात भी हुई कि अखिलेश गठबंधन धर्म को निभाने में नाकाम रहे और उन्होंने अपने विश्वस्तों को महत्व दिया. वहीं इस बार अखिलेश को गठबंधन को बनाए रखने के लिए कई कड़े फैसले करने पड़ रहे हैं.

बची सीटों पर सोबरन, राहुल के नाम की चर्चा

विधानपरिषद में सपा फिलहाल 4 सदस्य भेजने में समर्थ है. ऐसे में अगर स्वामी प्रसाद मौर्य और राजभर कोटे की एक सीट को छोड़ दिया जाए तो दो सीटें बचती हैं. इसके लिए पार्टी में कई दावेदार हैं. अखिलेश यादव के लिए अपनी करहल विधानसभा सीट खाली करने वाले सोबरन सिंह यादव का नाम लगभग तय माना जा रहा है.

सोबरन सिंह यादव के जरिए सपा जहां अपने गढ़ के नेता को आगे बढ़ा सकती है, वहीं अपने मूल वोट बैंक यादवों को भी संदेश दे सकती है. इसके अलावा समाजवादी पार्टी अनुसूचित जाति (SC) मोर्चा के राहुल भारती का नाम भी चर्चा में है.

अखिलेश के इन खास लोगों का क्या होगा

अखिलेश की कोर टीम में शामिल सुनील यादव (सुनील साजन) और राजपाल कश्यप के नाम पर भी चर्चा है तो पूर्व एमएलसी हीरा लाल यादव का नाम भी चर्चा में शामिल है.

Advertisement

हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विधानपरिषद में राम गोविंद चौधरी को भी अखिलेश यादव मौका दे सकते हैं क्योंकि इससे विधानपरिषद में उनके अनुभव का लाभ पार्टी को मिलेगा. बहरहाल अखिलेश इस समय इस मझधार में फंसे हुए हैं कि वे गठबंधन के साथियों को खुश करें या विश्वस्त कार्यकर्ताओं को. 

Advertisement
Advertisement