अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) में कोरोना के कहर के बीच एक राहत की खबर है. एएमयू के अधिकारियों ने बताया कि जीनोम सिक्वेंसिंग में किसी नए स्ट्रेन की पुष्टि नहीं हुई है. दरअसल, एएमयू में करीब 40 फैकल्टी की मौत के बाद हड़कंप मच गया था. आशंका था कि कैम्पस में कोरोना के नए वेरिएंट से मौत का आंकड़ा बढ़ रहा है.
इसके बाद कई कोरोना सैंपल को जीनोम सिक्वेंसिंग के लिए भेजा गया था. सीएसआईआर-इंस्टीट्यूट ऑफ जीनोमिक्स एंड इंटीग्रेटिव बायोलॉजी की रिपोर्ट आ गई है. इस रिपोर्ट में किसी नए वायरस का पता नहीं चला है. इसका मतलब है कि एएमयू परिसर में कोरोना से मौतें डबल वेरिएंट या बी.1.617.2 से हो रही है.
इस बीच जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में चिकित्सा संकाय के पूर्व डीन 75 वर्षीय प्रोफेसर अबू कमर की रविवार को कोरोना से मौत हो गई. इनकी मौत से दो दिन पहले ही एएमयू के पूर्व प्रॉक्टर 76 वर्षीय प्रोफेसर नसीम बेग की नई दिल्ली के एक अस्पताल में मौत हुई. नसीम बेग भी कोरोना संक्रमित थे.
पिछले एक महीने में 17 सेवारत प्रोफेसर सहित कम से कम 38 लोगों की कोरोना या कोरोना जैसे लक्षणों से मौत हो चुकी है. इसके बाद से कोरोना के नए वेरिएंट को लेकर कई तरह की चर्चाएं थी. इसका पता लगाने के लिए नई दिल्ली के सीएसआईआर-इंस्टीट्यूट ऑफ जीनोमिक्स एंड इंटीग्रेटिव बायोलॉजी में कोरोना के कुछ सैंपल भेजे गए थे.
जेएनएमसी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि नई दिल्ली में सीएसआईआर को जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए भेजे गए नमूनों में कोरोनोवायरस के किसी भी नए स्ट्रेन का पता नहीं चला है. प्रोफेसर हारिस मंजूर खान ने कहा कि जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए सीएसआईआर को भेजे गए 20 नमूनों में से 18 (90 प्रतिशत) में बी.1.617.2 था.
बी.1.617.2 को डबल म्यूटेशन वैरिएंट के रूप में जाना जाता है, जिसे पहली बार 5 अक्टूबर, 2020 को महाराष्ट्र में पहचाना गया था. प्रोफेसर हारिस मंजूर खान ने कहा कि यह बी.1.617 का ही सब वेरिएंट है, जिससे उत्तर प्रदेश में कोरोना की दूसरी लहर की वजह मानी जा रही है. बी.1.617 बाकी वेरिएंट से काफी खतरनाक है.