अयोध्या में भव्य दीपोत्सव की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं. इस बार दीपोत्सव को भव्य बनाने के लिए अवध यूनिवर्सिटी को पांच लाख दीपक जलाने की जिम्मेदारी दी गई है. इसके चलते विश्वविद्यालय ने छह लाख दीपकों की सप्लाई का टेंडर भी निकाल दिया है. 11 नवंबर से 13 नवंबर तक होने वाले इस कार्यक्रम के लिए दीपोत्सव की जगहें चुन ली गई हैं. बाकी अन्य सभी तैयारियां भी जोरों पर हैं. इस दीपोत्सव के मौके पर सरयू के तट पर कुल 24 बड़े और छोटे घाटों को रोशनी से चमकाने के लिए तय कर लिया गया है.
दीपोत्सव के दौरान कोविड-19 महामारी को देखते हुए, सरकार द्वारा जारी गाइडलाइन को फॉलो करने की भी पूरी तैयारी की गई है. दीपकों को सजाने के दौरान भी दूरी का विशेष ध्यान रखा जाएगा. इस बार सजाए जाने वाले सभी दीये एक ही आकार के होंगे, क्योंकि इस दीपोत्सव को गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में भी शामिल कराए जाने का प्लान है.
रिकॉर्ड के मानक के मुताबिक दीपकों को कम से कम 35 से 40 मिनट तक जलते रहना चाहिए. इसलिए इस बार इस्तेमाल किए जाने वाले दीपक आकार में थोड़े बड़े होंगे. इन दीपों को जलाने के लिए अवध विश्वविद्यालय के छात्रों के अलावा डिग्री और इंटर कॉलेज से करीब 8000 छात्रों को लगाया जा रहा है. इसके लिए बकायदा उन लोगों को परिचय पत्र जारी किया जाएगा और कोविड-19 इसके चलते उन्हें जरूरी ट्रेनिंग भी दी जाएगी.
यूपी की सत्ता संभालने के बाद से योगी आदित्यनाथ की सरकार दीपावली के मौके पर भव्य दीपोत्सव का आयोजन करती आ रही है. वर्ष 2017 में अयोध्या में राम की पैड़ी पर 1 लाख 65 हजार दीप जलाकर रिकार्ड बनाया गय तो इसके अगले वर्ष 2018 में 3 लाख 150 दीयों से राम की पैड़ी रोशन हुई थी.
पिछले वर्ष दीपोत्सव में अब तक के सबसे अधिक 5 लाख 51 हजार दीप जले थे. अयोध्या के लिए वर्ष 2020 की दीपावली कई मायनों में बेहद खास है. राम मंदिर-बाबरी मस्जिद विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद की यह पहली दीपावली है. यह पहली दीपावली होगी जब अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण भी शुरू हो चुका है.