उत्तर प्रदेश के अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण कार्य शुरू हो गया है. श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र की ओर से गुरुवार को ट्विटर पर इसकी जानकारी दी गई. साथ ही ट्रस्ट ने बताया कि मंदिर निर्माण में किस तरह की बातों का ध्यान रखा जाएगा और लोहे का प्रयोग नहीं किया जाएगा.
आपको बता दें कि 5 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अयोध्या में राम मंदिर की नींव रखी थी. इस दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, यूपी की राज्यपाल आनंदी पटेल समेत अन्य कई लोग उपस्थित रहे.
ट्रस्ट की ओर से जो मुख्य जानकारियां साझा की गई हैं, उनके अनुसार:
• CBRI रुड़की और IIT मद्रास के साथ मिलकर निर्माणकर्ता कंपनी L&T के अभियंता भूमि की मिट्टी की जांच कर रहे हैं.
• मंदिर निर्माण के काम में लगभग 36-40 महीने का समय लगने का अनुमान है.
• मंदिर का निर्माण पुरानी परंपराओं के तहत किया जाएगा, ताकि भूकंप जैसी परिस्थितियों से निपट सके.
• मंदिर के निर्माण में लोहे का प्रयोग नही किया जाएगा.
राम मंदिर निर्माण के लिए नए मॉडल को मंजूरी दे दी गई थी, जिसके बाद लोगों से चंदा देने की अपील भी की गई. ट्रस्ट की ओर से ट्विटर अकाउंट पर सभी जानकारी साझा की गई हैं, जिसके जरिए कोई भी व्यक्ति चंदा दान में दे सकता है.
जानकारी के मुताबिक, राम मंदिर में निचले फ्लोर से ऊपर की दो मंजिल बनने में 14-18 महीने का वक्त लग सकता है. जिसके बाद करीब 6 महीने मंदिर के अंतिम कार्यों में लगेंगे. इसमें 161 फीट के शिखर का काम भी शामिल है. मंदिर में 5 गुंबद का निर्माण हो सकता है जिसमें ज्यादा से ज्यादा वक्त लगेगा.