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बाइक्स ऑफ बिजनौर: लॉकडाउन के वक्त छूट गई थीं प्रवासियों की साइकिलें, अब लोग ले सकते हैं किराये पर

लॉकडाउन के समय जो मजदूर बाहर से अपनी साइकिलों से चल कर अपने घरों के लिए वापस जा रहे थे तब प्रशासन ने उन्हें बिजनौर में रोककर उनकी साइकिलें यहीं खड़ी करा दी थीं और उनको बसों द्वारा उनके गंतव्य के लिए भेज दिया था. तब से ये साइकिलें यहीं खड़ी थीं और खराब होने लगी थीं.

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10 स्टैडों पर मिलेंगी साइकिलें
10 स्टैडों पर मिलेंगी साइकिलें
स्टोरी हाइलाइट्स
  • बिजनौर में 'बाइक्स ऑफ बिजनौर' की शुरुआत की
  • साइकिल का किराया भी मात्र 5 रुपये रखा गया है
  • डीएम-एसपी ने योजना की शुरुआत की थी

यूपी के बिजनौर जिले में जिला प्रशासन ने एक खास योजना की शुरुआत की है. इसका नाम 'बाइक्स ऑफ बिजनौर' रखा गया है. जिले की आम जनता को सुविधा पहुंचाने के उद्देश्य के साथ इस योजना की शुरुआत की गई है. इस योजना को जिले के अलग-अलग क्षेत्र से जिला मुख्यालय पर अपने काम के लिए आने वाले लोगों के लिए साइकिल उपलब्ध कराने के लिए शुरू किया गया है.

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बिजनौर में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू हुई इस योजना के तहत बाहर से आने वाले मजदूर या अपने किसी भी कार्य के लिए जिला मुख्यालय पर आने वाले लोगों को किराए पर साइकिल दी जाएगी. इस योजना में लोगों को दी जाने वाली साइकिल का किराया भी मात्र 5 रुपये रखा गया है.

10 स्टैंड्स पर मिलेंगी साइकिलें

बिजनौर जिले के अलग-अलग हिस्सों से किसी काम से जिला मुख्यालय आने वाले लोग इन साइकिलों को लेकर शहर में अलग-अलग जगहों पर घूम कर अपने काम निपटा सकेंगे. बाद में अपना काम निपटाने के बाद घर जाने से पहले शहर में बने 10 बाइक स्टैंडों में से किसी भी स्टैंड पर इन साइकिलों को खड़ा कर कर वापस जाया जा सकता है.

इस योजना का शुभारंभ डीएम और एसपी ने खुद साइकिल चलाकर 9 मार्च को किया था. अब इसकी शुरुआत के बाद लोगों ने इस योजना का लाभ उठाना शुरू कर दिया है. प्रशासन ने योजना के पहले महीने साइकिल किराये पर लेने पर किराया भी माफ कर दिया है. अगले महीने से इस योजना के तहत साइकिल लेने वाले व्यक्ति को 6 घंटे के लिए सिर्फ 5 रुपये  किराया देना होगा.

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लॉकडाउन के वक्त घर जाने वाले लोगों की थीं ये साइकिलें

दरअसल लॉकडाउन के समय जो मजदूर बाहर से अपनी साइकिलों से चल कर अपने घरों के लिए वापस जा रहे थे तब प्रशासन ने उन्हें बिजनौर में रोककर उनकी साइकिलें यहीं खड़ी करा दी थीं और उनको बसों द्वारा उनके गंतव्य के लिए भेज दिया था. तब से ये साइकिलें यहीं खड़ी थीं और खराब होने लगी थीं.

लॉकडाउन में मजदूर छोड़ गए थे साइकिल

सभी के खाते में भेज दिए गए साइकिलों के पैसे

साइकिलों की खराब होती हालत देख ज्वाइंट मजिस्ट्रेट विक्रमादित्य मलिक ने एक योजना शुरू की जिसका नाम 'बाइक्स ऑफ बिजनौर' दिया गया. इस योजना के तहत इन सभी साइकिल को सही कराया गया और जिनकी यह साइकिल थी उन मजदूरों को इन साइकिलों के पैसे उनके खातों में ट्रांसफर कर दिए गए.

इन साइकिलों को खड़ा करने के लिए शहर के विभिन्न स्थानों पर 10 स्टैंड भी बनवाए गए हैं. सभी साइकिल स्टैडों पर इन साइकिलों को खड़ा करा दिया गया है. ताकि जनपद के अलग-अलग क्षेत्रों से जिला मुख्यालय पर आने वाले गरीब और मजदूर तबके के लोग या आम आदमी जो भी इन साइकिलों को किराए पर लेकर शहर में अपने काम निपटाना चाहता हो ले सके.

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साइकिल लेने के लिए देनी होगी आधार कार्ड की फोटोकॉपी

काम हो जाने के बाद अपने घर के लिए निकलने से पहले लोगों को साइकिल वहीं स्टैंड पर खड़ी करनी होगी. इसके दो लाभ होंगे एक तो बाहर से आने वाले व्यक्ति को अपने काम के लिए पैदल भटकना नहीं पड़ेगा और दूसरा शहर में साइकिल चलने से प्रदूषण भी कम होगा. इस योजना के तहत साइकिल लेने वाले व्यक्ति को साइकिल स्टैंड पर अपना आईडी कार्ड और आधार कार्ड की फोटो प्रति जमा करनी होगी. उसके बाद उसको साइकिल किराए पर मिल जाएगी.

किराये पर मिलेंगी साइकिल

ये स्टैंड बिजनौर जिला अधिकारी कार्यालय के बाहर शास्त्री चौक और तहसील मुख्यालय के बाहर के साथ-साथ अलग-अलग दस स्थानों पर बनाए गए हैं. 9 मार्च को जिलाधिकारी रमाकांत पांडे, पुलिस अधीक्षक डॉक्टर धर्मवीर सिंह ने बकायदा खुद साइकिल चलाकर इस योजना की शुरुआत कर दी है.

इस योजना की शुरुआत होने के बाद अब लोगों को इन बाइक्स स्टैंड से साइकिल एक किराए पर मिलना शुरू हो गई हैं. लोग साइकिल को किराए पर लेकर अपने शहर में होने वाले काम भी निपटाने लगे हैं. यह योजना बिजनौर में शुरू हुई पहली योजना है. अभी तक इस तरह की योजना किसी और शहर में नहीं है. इससे आम लोगों को आने वाले समय में काफी लाभ मिलने की संभावना है.

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