कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी ने कहा कि प्रियंका गांधी सोनभद्र पीड़ित परिवारों से मिलने जाना चाहती थीं लेकिन मिर्जापुर जिला प्रशासन ने उन्हें सीएम योगी आदित्यनाथ के इशारे पर अवैध तरीके से रोका. प्रियंका गांधी सोनभद्र अकेले जाने के लिए भी तैयार थीं. यहां तक कि पुलिस ने गेस्ट हाउस में भी उन्हें पीड़ित परिवारों से मिलने से रोकने का प्रयास किया. राज्य में इमरजेंसी जैसे हालात हैं.
कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी ने शनिवार को यूपी के राज्यपाल राम नाइक से भी मुलाकात की और राज्य में सत्ताधारी सरकार और विपक्षी पार्टियों के बीच सोनभद्र हत्याकांड को लेकर चल रहे घमासान पर बातचीत की. सोनभद्र हत्याकांड में 10 लोगों की जान चली गई. तिवारी ने कहा, 'सरकार नहीं चाहती कि कोई पीड़ितों के आंसू पोंछे. जो भी हुआ वह असंवैधानिक था और ऐसा लगता है कि यूपी सरकार ने अघोषित आपातकाल लागू किया हो ताकि उसकी कमियों को छिपाया जा सके.'
सोनभद्र में बुधवार को भूमि विवाद को लेकर हुई झड़पों में 10 लोग मारे गए थे. प्रियंका पीड़ितों के परिवार के सदस्यों से मिलना चाहतीं थीं, लेकिन प्रशासन ने उन्हें रोका दिया और वह विरोध दर्ज करने के लिए धरने पर बैठ गईं. हालांकि शनिवार को प्रियंका गांधी वाड्रा ने 24 घंटे के बाद अपना धरना खत्म किया और दिल्ली रवाना हो गईं.
उन्होंने कहा, 'मैं वापस दिल्ली जा रही हूं क्योंकि पीड़ित परिवार से मिलने का मेरा मकसद पूरा हो गया है. लेकिन मैं जल्दी ही वापस आऊंगी. मैं अपने भाई राहुल गांधी के निर्देशों के अनुसार यहां आई थी.' उन्होंने काशी विश्वनाथ मंदिर और वाराणसी के काल भैरव मंदिर में पूजा-अर्चना करने के बाद दिल्ली का रुख किया.
हालांकि शनिवार को मिर्जापुर के डीएम ने भी यू-टर्न ले लिया. उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता जाने के लिए स्वतंत्र हैं क्योंकि उन्हें न तो गिरफ्तार किया गया है और न ही हिरासत में लिया गया है. प्रियंका गांधी ने पीड़ितों के परिवार से शनिवार सुबह मुलाकात की, जो उनसे मिलने चुनार स्थित गेस्ट हाउस आए थे. कांग्रेस महासचिव ने उन्हें हर संभव मदद का भरोसा देते हुए कहा कि वह जल्द वापस आएंगी. कांग्रेस पार्टी पीड़ितों को 10-10 लाख रुपये मुआवजा भी देगी.