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कोरोना: UP का बुरा हाल, इटावा में मरीजों के लिए शौचालय नहीं, मेरठ के गांवों में बढ़ने लगे केस

उत्तर प्रदेश के अलग-अलग इलाकों में इस वक्त कोरोना का संकट है और यहां के अस्पतालों में मरीजों के इलाज के लिए सुविधाओं की किल्लत है.

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ऑक्सीजन के सिलेंडर को लेकर भी परेशान हैं लोग (फोटो: PTI)
ऑक्सीजन के सिलेंडर को लेकर भी परेशान हैं लोग (फोटो: PTI)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • उत्तर प्रदेश के अलग-अलग इलाकों में कोरोना संकट
  • कोरोना के बढ़ते खतरे के बीच सुविधाओं की कमी

देश के अलग-अलग हिस्सों में कोरोना के कारण बुरा हाल है. महामारी जितनी तकलीफ दे रही है, उससे भी ज्यादा तकलीफ चरमराई हुई स्वास्थ्य व्यवस्था दे रही है. उत्तर प्रदेश के अलग-अलग इलाकों में इस वक्त कोरोना का संकट है और यहां के अस्पतालों में मरीजों के इलाज के लिए सुविधाओं की किल्लत है.

इटावा में अस्पताल का बुरा हाल
उत्तर प्रदेश के इटावा में स्थित कोविड अस्पताल का हाल तो ऐसा है कि यहां मरीज़ों या उनके साथ आए परिजनों के लिए शौचालय की सुविधा ही नहीं है. इटावा के ज़िला अस्पताल में लोगों की भीड़ है, यहां पर कोरोना के मरीज़ों का तांता लगा है. 

मरीजों के परिजनों की मानें, तो अस्पताल में शौचालय की व्यवस्था नहीं है, जो हैं वो बंद पड़े हैं. ऐसे में मरीज़ हो या फिर तीमारदार, अगर किसी को शौच के लिए जाना है तो वह अस्पताल के बाहर खुले में जा रहा है. सिर्फ इतना ही नहीं, तीमारदारों की मानें, तो यहां पर डॉक्टर भी सिर्फ राउंड पर आ रहा है.  

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मेरठ के गांवों में मिल रहे कोरोना मरीज़
मेरठ में पांच मई के बाद से ग्रामीण इलाकों में कोरोना टेस्टिंग का अभियान चलाया गया है. अभी तक कई गांवों में सैकड़ों लोग कोरोना पॉजिटिव पाए जा चुके हैं. प्रशासन द्वारा अब लोगों को मेडिकल किट मुहैया करवाई जा रही है.

स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक, अबतक कुल 6118 लोगों को मिले लक्षण मिले थे. 4500 लोग बुखार से पीड़ित मिले, 1200 लोग सर्दी जुकाम वाले मिले. अब सभी को मेडिकल किट दी गई है. बता दें कि पिछले कुछ दिनों में ही मेरठ के अलग-अलग गांवों में कोरोना का आंकड़ा बढ़ रहा है और ग्रामीण इलाकों में कोरोना की एंट्री हो चुकी है. 

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बरेली में एम्बुलेंस चालकों की मनमानी
उत्तर प्रदेश के ही बरेली में कोरोना संकट काल में एम्बुलेंस चालकों की मनमानी का मामला सामने आया है. बरेली के थाना कोतवाली क्षेत्र के रहने वाले जैनेन्द्र सिंह के पिता की तबीयत अचानक खराब हो गई थी, ऐसे में उन्हें एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल ले जाना था, जब एम्बुलेंस बुक की तो उसने 15 हजार रुपये की वसूली की.

ये किराया स्थानीय प्रशासन द्वारा तय किराये से पांच गुना ज्यादा था. जिसके बाद जैनेन्द्र सिंह ने मामले की शिकायत थाना कोतवाली बरेली में दर्ज करवाई. पुलिस ने अब महामारी एक्ट और अन्य मामलों के तहत एम्बुलेंस चालक पर केस दर्ज किया है. 

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में बीते कुछ दिनों में भले ही कोरोना के आंकड़ों में कुछ कमी आई हो, लेकिन ग्रामीण इलाकों में अब कोरोना संकट बढ़ने लगा है. सबसे अधिक चिंता की बात ये है कि ग्रामीण इलाकों में टेस्टिंग समेत अन्य सुविधाओं की भारी कमी है. 

 

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