देश में कोरोना वैक्सीन को लेकर नए रिकॉर्ड बन रहे हैं वहीं यूपी के बांदा से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है. यहां स्वास्थ्य विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई है. कर्मचारियों ने मृत बुजुर्ग दंपति को कोरोना वैक्सीन लगाने का सर्टिफिकेट जारी कर दिया. बुजुर्ग की मौत 25 जुलाई 2021 को हुई थी जबकि 3 फरवरी 2022 को उनको वैक्सीन की दूसरी डोज लगाना दिखाया गया है. इस परिवार के साथ यह दूसरा मौका है जब उनके किसी मृत बुजुर्ग को कोरोना का टीका लगा है.
जब यह मामला सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद डीएम ने इसका संज्ञान लिया और जांच के आदेश दिए. पीड़ित परिवार का कहना है कि इससे पहले भी जांच के आदेश हुए थे लेकिन उस जांच का क्या हुआ किसी को कुछ नहीं पता. परिवार का कहना है कि उन्हें हर हाल में सच्चाई का पता लगना चाहिए. आखिर इसके पीछे असली वजह क्या है.
जानकारी के मुताबित शहर के सर्वोदय नगर निवासी बुजुर्ग ललित बिहारी निगम की 25 जुलाई 2021 को मौत हो गई थी. इससे पहले उन्हें कोविड की पहली डोज लगाई गई थी. लेकिन कोविड की दूसरी डोज लगने से पहले ही उनका निधन हो गया था. बीते जुलाई माह में बुजुर्ग महिला को मौत हुई थी. उन्हें कोविड वैक्सीन की दूसरी डोज लगाई गई थी.
परिजनों के मुताबिक अचानक गुरुवार शाम उनके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर परिवार के मुखिया के कोविड की दूसरी डोज लगवाने की पुष्टि का मैसेज आया. साथ ही उस मैसेज पर ऑनलाइन सर्टिफिकेट डाउलोड करने का लिंक भी दिया गया था. सर्टिफिकेट के अनुसार मृत बुजुर्ग को प्रियंका कुशवाहा नाम की मेडिकल स्टाफ ने 3 फरवरी को कोविड की दूसरी डोज लगाई, जिसका बैच नंबर 4121AAO85A है.
डीएम ने दिए जांच के आदेश
परिवार का कहना है कि इस तरह से मृत लोगों को वैक्सीन लगाकर आंकड़ों को जबरन पूरा किया जा रहा है. डीएम ने इस मामले के जांच के आदेश दिए हैं. इसके बाद पूरे मामले की सच्चाई सबके सामने आ सकेगी. इस मामले में डीएम अनुराग पटेल ने बताया कि अभी तक कोई ऐसा मामला मेरे संज्ञान में नही था, आज ऐसा पहला मामला मेरे संज्ञान में आया है. इसकी जांच की जा रही है. कभी कभी टेक्निकल दिक्कतों की वजह से ऐसा हो जाता है.
(इनपुट- सिद्धार्थ गुप्ता)