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नोएडा: करोड़ों के प्रोजेक्ट पर कोरोना का साया, प्रवासी मजदूरों के पलायन से काम में रुकावट

जब से लॉकडाउन शुरू हुआ है ज्यादातर प्रवासी मजदूरों ने अपने  गांव का रुख किया है. रोज इस संख्या में इजाफा होता जा रहा है जिसका असर नोएडा के सरकारी और गैर-सरकारी प्रोजेक्ट पर पड़ रहा है.

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यूपी में कोरोना के मद्देनजर लागू सख्ती के बीच मजदूरों का पलायन जारी है. (फाइल फोटो)
यूपी में कोरोना के मद्देनजर लागू सख्ती के बीच मजदूरों का पलायन जारी है. (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • कोरोना की वजह से काम में रफ्तार नहीं
  • कई प्रोजेक्ट्स में देरी का अनुमान
  • प्रवासी मजदूरों के पलायन से काम में रुकावट 

कोरोना संक्रमण के मामले बढ़ने के साथ ही उत्तर प्रदेश सरकार ने सूबे में कर्फ्यू संबंधी सख्ती बढ़ा दी है. जिसके बाद से गौतमबुद्ध नगर (नोएडा) से प्रवासी मजदूरों का जाने का सिलसिला शुरू हो गया. जब से लॉकडाउन शुरू हुआ है ज्यादातर प्रवासी मजदूरों ने अपने गांव का रुख कर लिया है.

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रोज इस संख्या में इजाफा होता जा रहा है जिसका असर नोएडा के सरकारी और गैर-सरकारी प्रोजेक्ट पर साफ देखा जा सकता है. शहर के बड़े प्रोजेक्ट की बात करें तो अब यहां सिर्फ कुछ मजदूर बचे हैं. मगर कोरोना की वजह से काम में रफ्तार नहीं है और यह तय है कि सभी प्रोजेक्ट पूर्व निर्धारित समय सीमा में नहीं पूरे हो सकेंगे. 

नोएडा अथॉरिटी सीईओ रितु माहेश्वरी ने बताया कि सरकारी प्रोजेक्ट में मजदूरों की कमी के चलते काम की रफ्तार में कमी आई है. पर्थला गोलचक्कर पर निर्माणाधीन सिग्नेचर ब्रिज भी दिसंबर 2021 तक शुरू होना था. अब ऐसा माना जा रहा है कि हालात यही रहे तो यह प्रोजेक्ट वक्त पर पूरा नहीं हो सकेगा. वहीं, नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे पर सेक्टर-96 में अंडरपास बनाने का काम चल रहा था. यह इसी साल सितंबर तक बनकर तैयार होना था. लेकिन अब इसमें 6-7 महीने की देरी हो सकती है. 

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सेक्टर-71 अंडरपास हो या दिल्ली के चिल्ला रेगुलेटर से नोएडा के महामाया फ्लाईओवर तक एलिवेटेड रोड बनाने का महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट, यहां भी मजदूरों की बड़ी मुश्किल पेश आ रही है. इतना ही नहीं, कोरोना संक्रमण के चलते नोएडा प्राधिकरण के कई अधिकारी और कर्मचारी इसकी चपेट में आ चुके हैं. कुछ होम आइसोलेशन में हैं तो कुछ का इलाज चल रहा है. ऐसे में इन सभी प्रोजेक्ट के काम कछुए की रफ्तार से चल रहे हैं. 

 

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