scorecardresearch
 

लॉकडाउन से नहीं टूटेगी परंपरा, संकट मोचन संगीत समारोह का होगा डिजिटल आयोजन

मंदिर के महंत प्रोफेसर विश्वंभर नाथ मिश्र ने साफ कर दिया है कि यह परंपरा नहीं टूटेगी. समारोह का डिजिटल आयोजन होगा. फेसबुक लाइव के जरिए संगीत सरिता की धार बहेगी.

Advertisement
X
96 साल से होता आ रहा आयोजन (फाइल फोटो)
96 साल से होता आ रहा आयोजन (फाइल फोटो)

  • 12 से 17 अप्रैल तक होगा आयोजन
  • हनुमान जयंती पर हुई विशेष प्रार्थना

कोरोना वायरस के कारण देश में इस समय लॉकडाउन लागू है. लॉकडाउन के कारण वाराणसी में पिछले 96 साल से होते आ रहे संकट मोचन संगीत समारोह के 97वें साल के आयोजन को लेकर असमंजस था. अब मंदिर के महंत प्रोफेसर विश्वंभर नाथ मिश्र ने आजतक से बात करते हुए साफ कर दिया है कि यह परंपरा नहीं टूटेगी. समारोह का डिजिटल आयोजन होगा. फेसबुक लाइव के जरिए संगीत सरिता की धार बहेगी.

महंत प्रोफेसर मिश्र ने कहा कि जब यह संगीत समारोह अपने सौवें वर्ष की ओर बढ़ रहा है, तब हम इसका प्रवाह टूटने कैसे दे सकते हैं? परंपरा का प्रवाह जारी रहेगा. संगीत की गंगा बहती रहेगी. उन्होंने कहा कि हनुमानजी बल, विद्या और बुद्धि को देने वाले देवता हैं. सिर्फ बल से हर संकट या चुनौती का उपाय नहीं ढूंढा जा सकता. बल और बुद्धि का तालमेल ही विवेक है. अब तकनीक के साथ परंपरा का प्रवाह हो, यही आज के समय की जरूरत है. प्रोफेसर मिश्र ने लोगों से अपने घर के अंदर रहते हुए ही संकट की इस घड़ी में लोग हनुमानजी से प्रार्थना करें. संकट से वही उबारेंगे.

Advertisement

कोरोना पर फुल कवरेज के लि‍ए यहां क्ल‍िक करें

श्रीहनुमत जयंती चैत्र सुदी पूर्णिमा यानी 8 अप्रैल के दिन हुए आयोजन के संबंध में जानकारी देते हुए महंत प्रोफेसर मिश्र ने कहा कि सुबह 6 से 8 बजे तक पूजन-अर्चन और बैठकी की झांकी हुई. 7 बजे से रामायण का पूजन-अर्चन और मानस का एकाह पाठ, रामार्चा पूजन आदि धार्मिक अनुष्ठान पूर्व की भांति आयोजित हुए. उन्होंने लॉकडाउन के कारण मंदिर में श्रद्धालुओं के प्रवेश पर रोक के लिए खेद व्यक्त किया.

संकट मोचन मंदिर के महंत ने बताया कि 9 से 11 अप्रैल तक पारंपरिक सार्वभौम रामायण सम्मेलन की जगह मंदिर में ही हनुमानजी महाराज को रामचरित मानस की कथा का श्रवण कराया जाएगा. 12 से 17 अप्रैल तक संगीत समारोह का नियमित कार्यक्रम था, उसकी जगह सायं 7.30 बजे से इस कार्यक्रम का डिजिटल आयोजन किया जाएगा. उन्होंने बताया कि इसके लिए अब तक 20 कलासाधकों ने अपनी स्वीकृति दे दी है. इनमें पंडित जसराज भी शामिल हैं, जो अभी अमेरिका में हैं.

प्रोफेसर मिश्र ने कहा कि पंडित जसराज के साथ ही पंडित राजन-साजन मिश्र, अजय पोहनकर, अजय चक्रवर्ती, उस्ताद राशिद खान, अरमान खान, कौशिकी चक्रवर्ती, उल्लास कसालकर का गायन होगा. वहीं, राजेश-शिवमणि, विश्वजीत राय चौधरी, निलाद्री कुमार, शाकिर खां, उस्ताद मोईनुद्दीन खान-मोमिन खान, भजन सोपोरी-अभय सोपोरी अपनी वादन कला प्रस्तुत करेंगे.

Advertisement

कोरोना कमांडोज़ का हौसला बढ़ाएं और उन्हें शुक्रिया कहें...

उन्होंने बताया कि पंडित राममोहन महाराज और पंडित कृष्णमोहन महाराज नृत्य कला की प्रस्तुति देंगे. वहीं, पंडित कुमार बोस, सुरेश तलवलकर, अनिंदो चटर्जी, अनुब्रत चटर्जी, समर साहा, संजू सहाय, उस्ताद अकरम खान, जरगाम खान का तबला वादन भी होगा. बता दें कि श्मशान नाथ के दरबार में नगर वधुओं के नृत्य की तीन सौ साल से अधिक पुरानी परंपरा इस बार टूट गई थी.

Advertisement
Advertisement