प्रदेश में कोरोना संक्रमण की रफ्तार बढ़ती जा रही है. यहां का पूरा पंचायत चुनाव कोरोना संक्रमण काल में ही हुआ. ऐसे में चुनाव ड्यूटी में लगे कई कर्मचारियों की जान संक्रमण ने ले ली. इसके चलते अब पंचायत चुनाव की मतगणना ड्यूटी में लगे कर्मचारियों में डर बैठ गया है. क्योंकि चुनावी ड्यूटी के दौरान कई कर्मचारी पहले ही इस जानलेवा वायरस से संक्रमित हो चुके हैं. ड्यूटी में लगे हुए कई लोगों की कोरोना से मौत भी हो चुकी है. ऐसे में वोटों की गिनती रोकने की मांग उठने लगी है, ताकि कोई वायरस से संक्रमित ना हो और वो मौत के मुंह में जाने से बच सके.
प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षित स्नातक एसोसिएशन के अध्यक्ष विनय सिंह बताते हैं, जब कोरोनावायरस अपना पैर पसार रहा था, तभी हमने चुनाव आयोग से चुनाव टालने की मांग की थी, लेकिन आयोग ने हमारी एक भी नहीं सुनी और चुनाव करवाने में व्यस्त रहा. आज ये भयावह स्थिति आ गई है कि कई कर्मचारी संक्रमित होकर कोरोना से मौत के मुंह में जा चुके हैं.
विनय बताते हैं कि लगभग 100 से ज्यादा शिक्षकों ने इस पंचायत चुनाव में अपनी जान गंवाई है. क्या अब भी मतगणना कराना जरूरी है? आखिर उसे टाल क्यों नहीं दिया जाता, ताकि हम लोगों की जान बची रहे और हम अपने परिजनों के साथ सुरक्षित रहें. विनय सिंह ने ये आरोप भी लगाया कि सिर्फ बेसिक शिक्षकों को ही सारे कामों में लगाया जाता है जबकि राजकीय शिक्षकों और माध्यमिक शिक्षकों से चुनाव के दौरान कोई ड्यूटी नहीं ली जा रही.
वहीं, राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष हरि किशोर तिवारी ने बताया कि चुनावी ड्यूटी के दौरान हमने सरकार से सुरक्षा किट्स की मांग की लेकिन हमारी मांगो को पूरा नहीं किया गया और अब इसके कारण आज कर्मचारी कोरोना से संक्रमित हो रहे हैं और कुछ लोग तो इस महामारी में अपनी जान भी गंवा चुके हैं. इसीलिए हमारी मांग है कि काउंटिंग को स्थगित कर दिया जाए क्योंकि स्थिति भयावह हो चुकी है और अब लोग डरे-सहमे हुए हैं. क्योंकि कई कर्मचारियों के घर में मौतें हो चुकी हैं.
उन्होंने कहा, सरकार से हमारी यही मांग है कि इस परिस्थिति में कोई जरूरी नहीं है कि मतगणना की जाए. पहले वोटिंग के दौरान इनकी ड्यूटी लगाई गई और अब काउंटिंग के दौरान लगा दी गई. एक बार किसी तरह से कोरोना संक्रमण से निकले ही थे कि फिर दूसरी बार उनकी ड्यूटी मतगणना में लगा दी गई. कल देखिएगा जो चुनाव होगा उनके सभी बूथ खाली चलेंगे, क्योंकि लोग एप्लीकेशन दे रहे हैं और कोरोना पॉजिटिव होने की रिपोर्ट दे रहे हैं. हरि किशोर तिवारी ने आगे कहा, इस मतगणना को सरकार तुरंत रोके और जहां भी चुनाव हो रहे हैं वहां लोगों को पीपीई किट, सैनिटाइजर के साथ भेजा जाए. अगर मतगणना के लिए सहमति बनती है तो जो मतगणना करेगा उसकी पूरी कोरोना रिपोर्ट ली जाए और फिर उन्हें मतगणना का हिस्सा बनाया जाए.
सभी संगठनों ने एक स्वर में कहा कि मतगणना के दौरान मतगणना सेंटर पर आए हुए सारे कर्मचारी, अधिकारी और शिक्षकगण सभी मतपत्रों को अपने अपने हाथों से चुनेंगे. ऐसे में ये कौन बता सकता है कि कौन संक्रमित है और कौन नहीं? क्योंकि जो सही और स्वस्थ दिख रहे हैं, उनको सही नहीं माना जा सकता, क्योंकि लोग एसिम्प्टोमैटिक हैं और वायरस ने इनको घेर रखा है. ऐसे में तत्काल राज्य निर्वाचन आयोग को आगे आकर मतगणना को तब तक डाल देना चाहिए जब तक स्थिति सामान्य नहीं होती है.
खंड शिक्षा अधिकारी संघ के जनरल सेक्रेटरी वीरेंद्र कनौजिया की मानें तो संघ की तरफ से राज्य चुनाव आयोग को पत्र लिखा गया है कि मतगणना में कोविड-19 के प्रोटोकॉल का पालन करना संभव नहीं है. इस भयावह स्थिति में मतगणना तत्काल स्थगित कर दी जाए. खंड शिक्षा अधिकारी संघ ने ये भी मांग की है कि चुनाव ड्यूटी में लगे जिन लोगों की कोरोना से जान गई है, उनके परिजनों को 50-50 लाख रुपए का मुआवजा और नौकरी दी जाए.