
उत्तर प्रदेश में 600 से कम कोरोना केस वाले जिले अनलॉक किए जा रहे हैं. देश की सांस्कृतिक राजधानी काशी यानी यूपी के वाराणसी जिले में भी कोरोना कर्फ्यू हटा लिया गया है.
कोरोना कर्फ्यू हटाए जाने के बावजूद उन दुकानदारों को दुकान खोलने की इजाजत नहीं दी जाएगी, जिन्होंने कोरोना की वैक्सीन नहीं लगवाई है. वाराणसी के जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा ने साफ किया है कि 45 साल से अधिक उम्र के ऐसे व्यापारियों को दुकान खोलने की इजाजत नहीं दी जाएगी, जिन्होंने वैक्सीन नहीं लगवाई है.
जिलाधिकारी ने 18 से 45 साल तक के व्यापारियों और दुकानों पर काम करने वाले कर्मचारियों को भी वैक्सीनेशन के लिए 15 दिन का समय दिया है. डीएम ने वैक्सीनेशन के लिए ऑटो रिक्शा और अन्य वाहन चालकों को भी 15 दिन का अल्टीमेटम दिया है. उन्होंने यह भी कहा है कि उन राज्य कर्मचारियों का जून का वेतन भी रोका जाएगा, जिन्होंने वैक्सीन नहीं लगवाई है.
वाराणसी के जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा ने आजतक से बात करते हुए कहा कि वाराणसी में वैक्सीनेशन की गति को तेज करने के मकसद से सभी समूहों को जागरुक किया जा रहा है और यह प्रयास तीन-चार महीनों से जारी है. लॉकडाउन में भी सभी से वैक्सीन लगाने की अपील की गई थी.
उन्होंने कहा कि अब यह निर्णय लिया गया है कि वही लोग अपनी दुकान पर आ सकेंगे जो वैक्सीनेट हो चुके रहेंगे. इसलिए सभी व्यापारियों को यह सलाह दी गई है कि वे वैक्सीनेशन कराकर तैयार रहें.
डीएम ने बताया कि 18-45 साल तक के व्यापारियों को वैक्सीनेशन के लिए 15 दिन का समय दिया गया है. 15 दिन बाद वैक्सीनेट होने की स्थिति में ही उन्हें दुकान खोलने दी जाएगी. वैक्सीनेट होने तक उनको दुकान बंद रखने की सलाह दी जाएगी. व्यापारियों को बता भी दिया गया है कि वे स्थान का चयन कर लें. स्वास्थ्य विभाग की टीम उनकी ओर से चिह्नित स्थान पर जाकर वैक्सीन लगा देगी और वर्क साइट पर भी उनका वैक्सीनेशन हो जाएगा.
हाई रिस्क वालों की करा रहे नियमित जांच
वाराणसी के जिलाधिकारी ने कहा कि जो लोग हाई रिस्क में हैं, उनकी नियमित जांच कराई जा रही है. इनमें ज्यादातर ड्राइवर हैं. इसमें रोडवेज बस के साथ ही ऑटो रिक्शा चालक भी शामिल हैं. इनको भी वैक्सीनेशन के लिए 15 दिन का वक्त दिया गया है. उन्होंने बताया कि राज्य सरकार के कर्मचारियों को जून की सैलरी तभी जारी करने के लिए कहा गया है, जब उनको वैक्सीन की कम से कम एक डोज लग चुकी हो.
डीएम ने कहा कि ऐसा इसलिए क्योंकि देखा गया है कि मौत की स्थिति में ये आक्रोश जाहिर करते हैं और प्रिवेंटिव एक्शन के समय अपनी जिम्मेदारी निभाते नहीं हैं. इसलिए सभी सरकारी कर्मचारियों को बैठकों के जरिए भी बताया जा चुका है कि वे वर्कसाइट पर ही वैक्सीन लगवा सकते हैं. केंद्र सरकार के कर्मचारियों को भी जून में ही वैक्सीन लगवाने की सलाह दी गई है.